- दुदही के श्रीराम जानकी मंदिर में श्रीराम कथा का आयोजन
दुदही। श्रीराम जानकी मंदिर, दुदही सुराजी बाजार में श्रीराम कथा के चौथे दिन कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं और अहिल्या उद्धार प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बचपन में मिले संस्कार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला होते हैं और यही संस्कार जीवन की दिशा तय करते हैं।
कथा के दौरान वाचक ने कागभुशुंडि प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म के बाद कागभुशुंडि ने संकल्प लिया था कि प्रभु के पांच वर्ष की आयु तक वे अयोध्या में रहकर उनकी बाल लीलाओं का दर्शन करेंगे। कागभुशुंडि भगवान के हाथों से गिरा हुआ प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य मानते थे।
कथावाचक ने कहा कि कागभुशुंडि कोई सामान्य कौवा नहीं थे। उनकी भक्ति और ज्ञान का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान शिव भी उनसे श्रीराम कथा सुनने जाते थे। उन्होंने भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप, धूल में खेलते हुए उनके मनोहारी चित्रण तथा माता कौशल्या और राजा दशरथ के वात्सल्य भाव का भी वर्णन किया।
नामकरण संस्कार की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में वर्णित 16 संस्कारों में नामकरण संस्कार का विशेष महत्व है। नाम व्यक्ति के भाग्य और भविष्य को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में ग्रह-नक्षत्रों और राशि के अनुसार नाम रखने की व्यवस्था रही है, जिससे व्यक्ति के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस दौरान गिरजेश जायसवाल, रामकुमार जायसवाल, हरिकेश गुप्ता, राजेश गुप्ता, विश्व बंधु जायसवाल, विंध्याचल आदि मौजूद।