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Kushinagar News: जांच टीम ने तहसीलदार को सौंपी सत्यापन रिपोर्ट, 17 परवाना आदेश फर्जी

Sun, 16 Feb 2025 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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खड्डा। फर्जी आदेश तैयार कराने के बाद परवाना भेजकर राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने के मामले में एआरओ कार्यालय जांच के लिए पहुंची दो सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट शनिवार को सौंप दी। इसमें एआरओ कार्यालय से जांच के बाद 17 परवाना का आदेश फर्जी पाया गया है। उस तिथि में कोई भी परवाना खड्डा तहसील को नहीं भेजा गया है। अब खड्डा तहसील प्रशासन ने इसमें शामिल जालसाजों और भू-माफियाओं पर तकेस दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
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गोरखपुर में खड्डा तहसील के शिवपुर, बसंतपुर, मरचहवा के अलावा नदी किनारे के अन्य गांवों का चल रहे रिकॉर्ड ऑपरेशन की सभी कार्रवाई करीब 13 वर्ष पहले पूरी हो चुकी है। इन गांवों के सभी राजस्व अभिलेख एआरओ कार्यालय से मंगाकर खड्डा तहसील में जमा करा दिए गए हैं। बावजूद इसके भू-माफिया और जालसाजों के गठजोड़ और तहसील के कुछ जिम्मेदारों की मिलीभगत से 18 सितंबर वर्ष 2024 को सात, 15 नवंबर वर्ष 2024 को सात और 11 दिसंबर वर्ष 2023 को तीन मुकदमे का आदेश खड्डा तहसील में राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने के लिए परवाना एआरओ कोर्ट गोरखपुर से भेजा गया था। तहसील प्रशासन की ओर से इन आदेशों के सत्यापन के लिए एआरओ कार्यालय को भेजे गए पत्र में फर्जी तरीके से सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर तहसील प्रशासन को भिजवा दी गई है। इस फर्जी आदेश को असली मानकर तीन आदेश मालिकान रजिस्टर में दर्ज भी करा दिया गया है।
इसकी जानकारी होने पर कुछ काश्तकार सक्रिय हुए और अधिकारियों से मामले की शिकायत की तो तहसीलदार ने जांच शुरू कराई। इस मामले में जांच के बाद रिपोर्ट में 17 परवाना आदेश संदिग्ध पाया गया है। जांच के दौरान पता चला कि एआरओ कोर्ट गोरखपुर के नाम से खड्डा तहसील को भेजा गया था। इसमें कुछ ऐसे लोगों का नाम भी शामिल है जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। मालिक रजिस्टर में भी इनका नाम दर्ज हो गया था।
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तहसीलदार के आदेश पर शुक्रवार को राजस्व निरीक्षक अजित कुमार व लेखपाल अजित कुमार की दो सदस्यीय टीम गोरखपुर एआरओ कोर्ट पहुंची। एआरओ कोर्ट से भेजे गए परवाना व मुकदमे के बारे में जांच की तो परवाना या मुकदमा आदेश वहां से उस तिथि में जारी ही नहीं किया गया था। इतना ही नहीं इस नाम बनाम व मुकदमा नंबर का कोई वाद कभी दाखिल हुआ था। राजस्व टीम ने अपनी रिपोर्ट तहसीलदार खड्डा को सौंप दी है। सूत्रों की मानें तो इसमें तहसील में तैनात कई जिम्मेदारों भी जांच की जद में आ रहे हैं। इसको लेकर कई भू-माफियाओं की पैरवी भी पहुंचने लगी है। हालांकि, तहसील प्रशासन इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर केस दर्ज कराने का दावा कर रहा है। इससे तहसील के जिम्मेदारों में खलबली मची है।

-जांच टीम की रिपोर्ट व सहायक अभिलेख अधिकारी गोरखपुर की सत्यापन आख्या में 17 परवाना व आदेश फर्जी पाए गए हैं। अब दोषियों के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। इसमें शामिल बाकी लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी तैयारी शुरू हो गई है।
- महेश कुमार, तहसीलदार, खड्डा

नदी इस पार गांव के कश्तकारों की जमीन पर भू-माफियाओं की नजर है। तहसील प्रशासन की मिलीभगत से इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है। इसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
- मनोज पांडेय, शिवपुर

एआरओ कार्यालय से जो फर्जी मुकदमे नंबर का आदेश तैयार कर भेजा जा रहा था। उसकी बिना जांच किए क्यों अभिलेखों में नाम दर्ज कर दिया जा रहा था। इससे तहसील में तैनात जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध है।
- अजय शर्मा, शिवपुर

कश्तकारों की शिकायत के बाद भी तहसील प्रशासन के जिम्मेदार नहीं सुन रहे हैं। इसकी बारीकी से जांच कराई जाए तो राजस्व अभिलेख में फर्जी आदेश पर फर्जीवाड़े के और मामले सामने आ सकते हैं।
- सचिंद्र सिंह, शिवपुर

छह माह से एआरओ कोर्ट गोरखपुर और खड्डा तहसील का चक्कर लगा रहा था। एआरओ कार्यालय जाने पर परवाना आदेश को फर्जी बता दिया जा रहा था, लेकिन लिखित में इसकी जानकारी नहीं दी जा रही थी।
- विनोद सिंह, शिवपुर

क्या है नियम
अधिवक्ता ओमप्रकाश लाल श्रीवास्तव ने बताया कि यदि एआरओ कोर्ट गोरखपुर में पहले से कोई मुकदमा अनिर्णीत अवस्था में लंबित है और रिकाॅर्ड ऑपरेशन की बंदोबस्त संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कर संबंधित संपूर्ण अभिलेख राजस्व अभिलेखागार में संचित हो चुके हैं। ऐसी सूरत में बादहूं पारित आदेश के अनुपालन के लिए स्वयं एआरओ अथवा विभागीय किसी सहायक के जरिए, उक्त आदेश के अनुपालन के लिए प्रेषित अभिलेखों के रियल कस्टोडियन आला अफसर डीएम से अनुमति लेने के बाद राजस्व अभिलेखापाल और एआरओ अथवा उनके सहायक की उपस्थिति में संबंधित आदेश का अनुपालन संबंधित अभिलेख में किया जा सकता है। अनुपालित आदेश के नीचे एआरओ अथवा उनके सहायक, राजस्व अभिलेखापाल दोनों के हस्ताक्षर होंगे, जैसा कि चंकबंदी आदेशों का अनुपालन बाद प्रकाशन धारा 52 नियम 109 सीएच एक्ट के तहत एसीओ और नायब तहसीलदार अथवा एलआरआई के समक्ष दोनों के हस्ताक्षरों से हुआ करता है। परंतु, इस तरह मनमाने तरीके से किसी आदेश व परवाना पर नाम दर्ज करना न्याय व कानून के विपरीत है।
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