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वर्ष 1995 से ही कोरोना महामारी हर साल निगलती है मासूमों को

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कोरोना संकटकाल में इंसेफेलाइटिस भी ढाने लगा है कहर
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कुशीनगर। वर्ष-1995 से अब तक सैकड़ों मासूमों को निगल चुका इंसेफेलाइटिस फिर से कहर ढाने को आमादा दिख रहा है। जनवरी-2021 से अब तक जनपद में 99 मासूम इस खतरनाक बीमारी के चंगुल में फंस चुके हैं। इनमें छह का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है, जबकि आठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। वहीं, मौजूदा वर्ष में ही बीमार पांच बच्चोें की मौत हो चुकी है।
इंसेफेलाइटिस की भयावहता की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पीआईसीयू से लेकर मिनी पीआईसीयू और ब्लॉक स्तर के सभी ईटीसी को तैयार कर रखा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर इस बीमारी से ग्रस्त मासूमों को भर्ती कर इलाज किया जा सके। वर्ष 1995 से शुरू हुई इंसेफेलाइटिस ने पूर्वांचल के सैकड़ों मासूमों का अपना ग्रास बनाया, लेकिन उनमें कुशीनगर के मासूमों की संख्या काफी अधिक रही। यही, वजह रही कि सुअर से जेई अर्थात जापानी इंसेफेेलाइटिस के फैलने की आशंका को देखते हुए सुअरबाड़ों को आबादी से दूर रखने और एईएस अर्थात एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (जलजनित) बीमारी से बचाव के लिए साधारण हैंडपंपों को हटाकर इंडिया मार्क टू हैंडपंप, ओवरहेड टैंक और टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) का निर्माण कराया गया। ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वच्छ पेयजल पहुंच सके। इसके अलावा इलाज का उत्तम इंतजाम हुआ। जिला अस्पताल में दस बेड का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक एसेंसियल केयर यूनिट) स्थापित हुआ। कप्तानगंज और हाटा में मिनी आईसीयू और शेष सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बनाए गए। यह कोशिश भी रंग लाई। पहले जहां हर साल इंसेफेलाइटिस से मासूमों की मौत का आंकड़ा सैकड़ा के पार होता था, वह अब घटकर आठ से दस पर सिमट गया है। हालांकि इस साल जनवरी से अब तक इंसेफेलाइटिस की चपेट में आए बच्चों की संख्या पर नजर डालें तो 99 बच्चे इसकी चपेट में आ चुके हैं। इनमें पांच की मौत हो चुकी है। छह जिला अस्पताल और आठ मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।
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पीआईसीयू में बढ़ रहे मरीज
जिला अस्पताल के पीआईसीयू में इंसेफेलाइटिस के मरीज हर दिन बढ़ते दिख रहे हैं। अगस्त की एक तारीख को 11, दो को 13, तीन को 14, चार को 11, पांच को 12, छह को 15, सात को 16 और आठ तारीख को छह मरीज भर्ती थे। इनमें ज्यादातर मरीज तेज बुखार, झटका और अन्य मिलते जुलते लक्षण वाले भर्ती थे।
यह मरीज रहे भर्ती
इंसेफेलाइटिस रोगियों के लिए बने जिला अस्पताल में बने पीआईसीयू में रविवार को रागिनी पुत्री दिनेश उम्र तीन साल निवासी पुरैनी थाना रामकोला, बाबूलाल पुत्र शिवनारायण उम्र छह वर्ष निवासी रमवलिया थाना कसया, मीठी शर्मा पुत्री गिरजेश, तीन वर्ष निवासी सपहां थाना कसया, आसिया पुत्री रुस्तम उम्र चार माह निवासी सिकटा, थाना कुबेरस्थान, सचिन पुत्र बनारसी उम्र आठ वर्ष निवासी गंभीरिया थाना पडरौना और फातमा पुत्री आफताब उम्र छह वर्ष निवासी सिकटा थाना हाटा भर्ती थीं। यह तेज बुखार, झटका, दस्त आदि से पीड़ित थे।
पिछले 21 वर्षों इंसेफेलाइटिस ने हर साल सूूनी की माताओं की गोद
वर्ष 1995 में 62, 1996 में 96, 1997 में 18, 1998 में 26, 1999 में 53, 2000 में 86, 2001 में 25, 2002 में 41, 2003 में 45, 2004 में 58, 2005 में 280, 2006 में 135, 2007 में 130, 2008 में 128, 2009 में 124, 2010 में 129, 2011 में 133, 2012 में 125, 2013 में 160, 2014 में 145, 2015 में 142, 2016 में 161, 2017 में 126, 2018 में 37, 2019 में छह, 2020 में आठ और 2021 में अब तक पांच मासूमों की इस खतरनाक बीमारी से मौत हुई है।
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इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पूरा प्रयास किया जा रहा है। हाटा और कप्तानगंज में मिनी आईसीयू और शेष सभी ब्लॉकों की सीएचसी में इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। वहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा लोगों को स्वच्छ पेयजल के उपयोग, सफाई, मच्छरों से बचाव के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
-डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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