पडरौना। बढ़ती महंगाई अब पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रही, बल्कि रसोई से लेकर सड़क तक इसका असर दिखने लगा है। ईंधन महंगा होने से ढुलाई लागत बढ़ेगी, जिसका असर राशन, फल-सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर पड़ना तय है। आम आदमी की जेब के साथ अब उसकी बचत और उम्मीदों पर भी असर पड़ने लगा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है। ईंधन की इस महंगाई से आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ेगी और रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम बढ़ेंगे। इसका असर समाज के सभी वर्ग के लोगों पर पड़ेगा। रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान जैसे राशन, फल-सब्जियों की स्थानीय स्तर पर ढुलाई वाहन से होती है। डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ने से ढुलाई महंगी होगी, जिसका असर सीधे लोगों की जेब पर पड़ेगा।
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थोक दुकानों से फुटकर दुकानों तक सामान पहुंचाने में लगने वाला खर्च स्थानीय दुकानदार ही उठाते हैं। जो लागत और मुनाफा जोड़कर लोगों से लेते हैं। निश्चित रूप से पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई का असर सामानों की ढुलाई पर पड़ेगा। -शिवमोहन गुप्ता, व्यापारी।
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पेट्रोलियम पदार्थ महंगे होने से न केवल रोजमर्रा के सामानों के दाम बढ़ेंगे, बल्कि बाजार में मिलने वाली मोटरपार्ट्स समेत अन्य सभी सामानों के दाम आने वाले कुछ दिनों में बढ़ जाएंगे। इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। -निखिल सिंह, व्यापारी।