दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में इग्नू विश्व का सबसे बड़ा मुक्त विश्वविद्यालय है। भारत सहित विश्व के कई देशों में शिक्षा की ज्योति जलाने, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन सहित कई अन्य रोजगारपरक विषयों की शिक्षा दी जा रही है।
ये बातें इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अवध नारायण त्रिपाठी ने कही। वह शनिवार को बुद्ध पीजी कालेज कुशीनगर के ज्ञानेश्वर हाल में इग्नू अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित परिचय समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में कार्य की सिद्धि पराक्रम से होती है। प्रतिकूल परिस्थितियों और संसाधनों की कमी में कार्य को संपादित करना मायने रखता है। उन्होंने इग्नू में शिक्षण पद्धति के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। उनमें पहले नामांकन, अध्ययन सामग्री, काउंसिलिंग का बड़ा ही महत्व है। उन्होंने बताया कि छह माह के कोर्स के 16 क्रेडिट और एक साल के कोर्स के 32 क्रेडिट होते हैं।
परिचय समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ. डीएस तिवारी और प्राचार्य रामप्रकाश यादव ने भी विचार व्यक्त किया। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों की ओर से मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित कर किया गया। अध्ययन केंद्र के समंवयक डॉ. अमृतांशु शुक्ल ने अतिथि परिचय और स्मृति चिह्न भेंट किया। डॉ. सीमा त्रिपाठी ने अध्ययन केंद्र के बारे में विस्तार से अवगत कराया। केंद्र की ओर से मंचासीन अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। संचालन डॉ. गौरव तिवारी ने किया।
इस मौके पर डॉ. रामभूषण मिश्र, डॉ. आमोद राय, डॉ. सत्यप्रकाश, डॉ. रीना मालवीय, आलोक तिवारी, सत्येंद्र मिश्र, डॉ. त्रिभुवननाथ त्रिपाठी, डॉ. इंद्रजीत मिश्र, डॉ. उर्मिला यादव, डॉ. अजय कुमार मिश्र, डॉ. राजेश मिश्र, डॉ. अवधेश पांडेय सहित केंद्र में अध्ययनरत छात्र-छात्रा मौजूद रहे।