पडरौना। खड्डा पुलिस, स्वाट और साइबर सेल की टीम द्वारा गिरफ्तार किए गए चार साइबर ठगों की संपत्ति की जांच प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग कर सकते हैं। गिरफ्तारी के बाद एसपी ने इन दोनों विभागों को भी सूचना दी है। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि ईडी की टीम जल्द रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। पुलिस टीम ने मंगलवार को एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गैंग का खुलासा किया था। जिसमें सरगना रंजीत यादव सहित जालसाज विवेक यादव, विनोद यादव और अमित को गिरफ्तार किया गया था। इसमें गैंग का सरगना रंजीत यादव खुद को समाजवादी पार्टी का नेता बताते हुए आगामी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था।
राजनीति का चोला ओढ़ रंजीत के तैयार किए गए ठगी गैंग में भोले-भाले लोगों से लेकर सट्टा लगाने वाले लोगों को लालच देकर उनसे पहले बैंक खाते खुलवाए गए और फिर चीनी ऐप पर निवेश के लिए प्रेरित किया गया। कुछ दिनों तक लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए ऐप के वॉलेट में जीती हुई रकम दिखाई गई और बाद में उसे लॉक कर दिया। जिसका शिकार सैकड़ों लोग हुए और रंजीत व उसके गैंग ने कमीशन से करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली। इस प्रकरण की जानकारी एसपी ने प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को भी दिया है। गिरफ्तारी के बाद पांच करोड़ की संपत्ति सामने आई थी। साइबर ठगों ने जालसाजी का ऐसा नेटवर्क तैयार किया कि एक बार फिर जिला सुर्खियों में है।
ठगी से अर्जित करीब पांच करोड़ की संपत्ति में वाहन, सोना पुलिस ने बरामद भी किया। आरोपियों के पास से नेपाली, भारतीय कूटरचित दस्तावेज भी मिले। जिसमें रंजीत की दखलंदाजी अधिक है। वह इस साइबर गैंग का सरगना है। अवैध तरीके से अर्जित किए गए धन को राजनीति में खर्च करने की तैयारी शुरू कर दी थी। वह आगामी जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ना चाहता था। सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि इस गैंग में कई अन्य चेहरे भी हैं जिनके विषय में पुलिस तफ्तीश कर रही है।