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सरकारी विद्यालय दे रहा कॉन्वेंट स्कूल को टक्कर

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रूदवलिया का मॉडल स्कूल के स्मार्ट क्लास में पढ़ते बच्चें।संवाद। - फोटो : KUSHINAGAR
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सरकारी विद्यालय दे रहा कॉन्वेंट स्कूल को टक्कर
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आदर्श मॉडल स्कूल रुदवलिया में नामांकन कराने के लिए मची होड़
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। आदर्श मॉडल स्कूल रूदवलिया किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं है। यहां डिजिटल क्लास भी चल रही है। यही वजह है कि इस विद्यालय में नामांकन कराने के लिए विद्यार्थियों में होड़ मची है। यह सब शिक्षकों की मेहनत की देन है।
इस विद्यालय में पांचवीं कक्षा तक विद्यार्थियों की संख्या करीब 700 पहुंच गई है। फाजिलनगर विकास खंड के आदर्श मॉडल विद्यालय रूदवलिया में प्रवेश करते ही लगता है जैस हम किसी कॉन्वेंट स्कूल में आ गए हैं। विद्यालय में साफ-सफाई और विद्यार्थियों का अनुशासन देखते बनता है। विद्यार्थी के विद्यालय न आने पर शिक्षक तत्काल उनके माता-पिता से संपर्क करते हैं। पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों की अतिरिक्त समय में पढ़ाई होती है।
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विद्यालय की स्थापना वर्ष 1966-67 में हुई थी। वर्ष 2010-11 में प्रभारी प्रधानाध्यापक रूप में सुनील त्रिपाठी ने कार्यभार संभाला। उस समय विद्यालय में 150 विद्यार्थी पढ़ते थे। दो शिक्षामित्र सुनैना मिश्र और संतोष प्रसाद के साथ मिलकर उन्होंने मेहनत की। स्कूल चलो अभियान के तहत बच्चों को स्कूल भेजने की अपील की। तब जाकर विद्यार्थियों की संख्या 200 हुई।
प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील ने खुद धन खर्च करस्मार्ट क्लास के लिए संसाधन जुटाए। कंप्यूटर, सीसीटीवी सहित अन्य उपकरणों को लगवाया। स्कूल में पीने का पानी, बॉयोमैट्रिक हाजिरी की व्यवस्था की। इस विद्यालय को वर्ष 2016 में आदर्श विद्यालय का खिताब मिला। प्रभारी प्रधानाध्यापक को एक लाख 20 हजार रुपये का इनाम भी मिला। उन्होंने इस रकम से डेस्क-बेंच सहित अन्य व्यवस्था की। वर्तमान में 718 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
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बेटियों को दिया जाता है पौधों का उपहार
विद्यालय में हरियाली भी खूब है। फूलों की क्यारी सजी है। पेड़-पौधे लोगों का मन मोह लेते हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्राओं को हर वर्ष दो-दो पौधों का उपहार दिया जाता है। महापुरुषों और प्रिय शिक्षक के नाम से पौधे विद्यार्थी घर या खेत में लगाते हैं।
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कोट
यह सब अभिभावकों में परिषदीय विद्यालयों के प्रति विश्वास जगाने के लिए किया जा रहा है। पौधों का उपहार देने के पीछे पर्यावरण के प्रति जागरुकता पैदा करने की कोशिश है। जल्द ही एक लाइब्रेरी बनाई जाएगी।
-सुनील कुमार त्रिपाठी, प्रभारी प्रधानाध्यापक
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इस तरह के विद्यालयों को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग किया जाएगा। हर अध्यापक को चाहिए वह अपने विद्यालयों में इस तरह के संसाधन जुटाए।
- डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा, बीएसए
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