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गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे : भूमि अधिग्रहण शुरू, फर्राटा भरेगा विकास

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तमकुहीराज तहसील क्षेत्र से गुजरने वाली एक्सप्रेसवे का इस तरह होगा मॉडल।स्रोत-सोशल मीडिया
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पडरौना/तमकुहीरोड। पूर्वांचल को बिहार और पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित गांवों में राजस्वकर्मी भू-अभिलेखों के आधार पर जमीन का सत्यापन कर रहे हैं।
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करीब 37,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 550 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे जिले की तमकुहीराज तहसील के 39 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके अलावा कसया तहसील के 35 और हाटा तहसील के 22 गांव भी परियोजना से जुड़ेंगे। इस तरह जिले के कुल 96 गांव सीधे तौर पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना से प्रभावित होंगे।
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में यह एक्सप्रेसवे सेवरही ब्लॉक के पकड़ीयार पूरबपट्टी, पकड़ीयार पश्चिमपट्टी, दवनहा, गौरी नरोत्तम, बनरहा पूरबपट्टी, सुमहीरानी, परसा, जगदीशपुर, कोटवा, भावपुर, सुमही बुजुर्ग उर्फ मेहदिया, सुमही मोहन सिंह, जवही दयाल सहित कई गांवों से होकर गुजरेगा। जवही दयाल के पास यह गंडक नदी को पार कर बिहार की सीमा में प्रवेश करेगा।
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भूमि सत्यापन की प्रक्रिया तेज :
भूमि अधिग्रहण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला मुख्यालय पर लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों की बैठक हो चुकी है। इसमें भू-अभिलेखों से मिलान कर अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का सत्यापन कर शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद से राजस्वकर्मी गांवों में रिकॉर्ड जांच का काम कर रहे हैं।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति :
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा। सेवरही ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि धनंजय तिवारी, पूर्व चेयरमैन त्रिभुवन जायसवाल, पूर्व चेयरमैन श्यामसुंदर विश्वकर्मा के अनुसार इस परियोजना से उद्योग, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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जिला प्रशासन के निर्देश पर भूमि सत्यापन का कार्य शुरू कर दिया गया है। सभी राजस्वकर्मियों को समयसीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

आकांक्षा मिश्रा, एसडीएम, तमकुहीराज
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आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा

यातायात होगा आसान:
गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक सफर का समय काफी कम होगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा सुगम बनेगी।
किसानों को लाभ:
फसलों और कृषि उत्पादों को मंडी व बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

रोजगार के अवसर: एक्सप्रेसवे निर्माण और इसके आसपास होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक हब विकसित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।

व्यापार को बढ़ावा:
क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और छोटे-बड़े व्यापारियों को नए बाजार मिलेंगे।

पर्यटन को गति:
कुशीनगर, गोरखपुर सहित आसपास के धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

आपात सेवाओं को मदद:
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से एंबुलेंस, फायर और अन्य आपात सेवाएं तेजी से पहुंच सकेंगी।



बिहार के आठ जिलों से भी गुजरेगा एक्सप्रेसवे

गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के बाद बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा। बिहार में भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहां यह एक्सप्रेसवे 39 अंचलों के 313 गांवों को जोड़ेगा।
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