तमकुहीरोड/गुरवलिया बाजार। मॉडल राॅकेट्री कैनसेट इंडिया छात्र प्रतियोगिता के लिए एनालॉग एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर (आका) द्वारा रॉकेट लांचिंग के लिए सत्संग भवन के पास ऑब्जर्वेशन सेंटर बनाया गया है। स्पेस हैबिटेट एक्सपीरियंस जोन (स्पेस स्टूडियो) में पूरी तरह अंतरिक्ष यात्रियों सरीखे ढल चुके प्रतिभागियों ने हर गतिविधियां अंतरिक्ष जैसी ही कीं।
देश के अलग-अलग शहरों से आईं नौ छात्राओं को 24 घंटे रखा गया, जहां उन्हें अंतरिक्ष जैसा खान पान, अंतरिक्ष जैसे ड्रेस, अंतरिक्ष जैसा ही जीवन चक्र का अनुभव कराया गया। ऑब्जर्वर रिपु दमन उपाध्याय ने बताया कि छात्राओं को स्पेस जैसा ही अनुभव दिया गया। इसमें अंतरिक्ष पर पानी है या नहीं, धूल का कण है उसमें से खनिज पाए जा सकते हैं या नहीं, ऐसे संभावनाओं के बारे में अनुभव कराया गया।
वहीं, इसके अलावा अंतरिक्ष यात्री जैसा ड्रेस पहनकर छात्राओं ने सूर्य, चंद्रमा और अन्य उपग्रह को टेलीस्कोप के माध्यम से देखा। स्पेस हैबिटेट से उन्हें महज चंद समय के लिए बाहर आने की अनुमति मिली। एक्सपीरियंस जोन के लिए बने स्पेस हैबिटेट स्पेस में छात्राएं पूरी तरह अंतरिक्ष यात्री के रूप में ढली नजर आईं। एनालॉग एस्ट्रोनॉट आदित्य पांड्या और आब्जर्वर रिपु दमन गाइड कर रहे थे।
रिपु दमन ने बताया कि ऐसे ही सैंपल चंद्रमा पर इकट्ठे किए जाते हैं। इसके बाद अंतरिक्ष के मौसम, तापमान और हवा से भी अंतरिक्ष यात्री अवगत हुए। पानी की मौजूदगी, मिनरल (खनिज) की उपलब्धता खोजी। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस फूड दिया गया, जिसे सामान्य भोजन के जैसे चबाया नहीं जाता, बल्कि निगला जाता है। स्पेस फूड महंगा होता है जिसकी कीमत 400 रुपये होती है और 10 ग्राम का एक पैकेट होता है।
छात्रों ने बनाई है कैनसेट राॅकेट की डिजाइन
तमकुहीरोड। प्रतियोगिता के लिए सभी कैनसेट राॅकेट की डिजाइन को छात्रों द्वारा निर्मित किया गया है। सोमवार को 10 राॅकेट लांच किए जाने का शेड्यूल था, लेकिन तकनीकी कारणों से चार राॅकेट ही लांच किए गए। पहला राॅकेट लांचिंग के बाद उसका सेटेलाइट पैराशूट के सहारे नीचे आया। दूसरा राॅकेट 9.35 बजे छोड़ा गया। यह 600 मीटर की ऊंचाई तक गया। तीसरा 9.45 बजे छोड़ा गया जो 700 मीटर ऊंचाई पर और चौथा राॅकेट 9.50 बजे लांच किया गया। यह 800 मीटर की ऊंचाई पर गया। इसके बाद लांचिंग कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने इस कार्यक्रम से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, छात्र-छात्राओं, तकनीकी टीम के सदस्यों और क्षेत्रीय लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन युवाओं के लिए प्रेरणादायक होगा और युवा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूक होकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इस दौरान एसडीएम आकांक्षा मिश्रा, क्षेत्राधिकारी राकेश प्रताप सिंह, सांसद प्रतिनिधि धीरज त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
आसपास के गांव तीन घंटे नो मेंस लैंड घोषित
रकबा जंगलीपट्टी में सोमवार को मॉडल राॅकेट्री कैनसेट प्रतियोगिता को लेकर सुरक्षा कारणों से सुबह सात से 10 बजे तक अगल-बगल के सभी गांवों को नो मेंस लैंड घोषित कर दिया गया था। जीरो पुल से पिपराघाट जाने वाले मार्ग को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया था और गंडक नदी के किनारे बसे तवक्कल टोला, दहारी टोला, नरवाजोत, देवनारायण टोला, उपाध्याय टोला सहित अन्य कई गांवों की आवाजाही का रूट डायवर्जन कर गोला घाट के रास्ते कर दिया गया था। राॅकेट लांचिंग समाप्त होने के बाद सभी रूट खोल दिये गए और आवाजाही बहाल कर दी गई।