पडरौना/तमकुहीराज। युवाओं की ओर से भौकाल के लिए तैयार किया गया गैंग व ग्रुप जिले के बड़े-बड़े गिरोह के गैंग लीडरों के लिए अवैध धंधे संचालित कर कमाई का जरिया बन गया है। कभी इन्होंने भौकाल और युवाओं में धौंस जमाने के लिए स्पोर्ट्स बाइक और उसपर महाकाल, गैंगस्टर जैसे नाम लिखकर से शुरुआत की थी, लेकिन आज पैसों की लालच ने इन्हें राह बदलने को मजबूर किया।
पशु से लेकर शराब तस्करी, छिनैती, लूट, अपरहण, धमकी, मारपीट अन्य बड़ी और छोटी वारदातों में अक्सर इस गैंग से जुड़े युवा शामिल रहते हैं। इस गैंग से जुड़े युवाओं के हाथ स्पोर्ट्स बाइक, दमदार बुलेट में मॉडिफाइड साइलेंसर और नंबर प्लेट पर महाकाल, गैंगस्टर और अन्य नाम से यह क्षेत्र में धौंस जमाते हैं। फोटो पर थीम सांग लगाकर अपना दबदबा दिखा रहे हैं।
वर्चस्व को कायम रखने के लिए बड़े-बड़े गैंग के सरगना और लीडर पैसों की लालच में युवाओं को तस्करी से लेकर लूट हत्या जैसे जघन्य अपराध के दलदल में ढकेल रहे हैं। भौकाल दिखाकर मारपीट और अपने दबदबे को कायम रखने के लिए बने गैंग इन दिनों अवैध कार्यों को लेकर चर्चा में हैं। सबसे अधिक सीमावर्ती तरयासुजान से लेकर तमकुहीराज और सेवरही के इलाकों में इनका आतंक है। 90 के दशक में विभिन्न थाना क्षेत्रों में सक्रिय रहे दस्यु गैंग के गिरोह की सक्रियता के बाद अब 21वीं सदी में महाकाल ग्रुप और रफ्तार गैंग के नए चेहरों ने न केवल पुलिस के लिए चुनौती बने हैं, बल्कि जिले और आसपास के क्षेत्र में तैयार बड़े गिरोह के वर्चस्व को कायम रखने की भूमिका निभा रहे हैं।
गोरखपुर, देवरिया के अलावा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र तमकुहीराज, सेवरही, दुदही के अलावा पड़ोसी प्रांत बिहार के गोपालगंज, पश्चिम चंपारण (बगहा, बेतिया) सिवान में सक्रिय महाकाल ग्रुप, रफ्तार गैंग के अलावा कई लोकल गैंगों के तार पशु और शराब तस्करी गिरोह से जुड़े हैं। सूत्रों की मानें तो सीमावर्ती इलाकों से तस्करी के अवैध धंधों को संचालित करने वाले गिरोह के सरगना व गैंग लीडर ने कॅरियर के रूप में उन युवाओं को जिम्मेदारी सौंप रखी है जो महाकाल ग्रुप, रफ्तार गैंग से ताल्लुक रखते हैं। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि सीमावर्ती इलाकों में तस्करी गैंग का वर्चस्व कायम रहे, इसके लिए वह नवयुवकों की ओर से संचालित उक्त सभी गिरोह से सामंजस्य बनाकर अपने मंसूबे में कामयाब हो रहे है।
महाकाल ग्रुप से जुड़े गुर्गों का सर्वाधिक आतंक सेवरही, तरयासुजान व थाना क्षेत्र में अधिक है तो देवरिया से जुड़े रफ्तार गैंग के गुर्गे भी जघन्य व अमानवीय अपराधों के लिए कुशीनगर के युवाओं को गैंग में शामिल करते हैं। इसके अलावा इस गिरोह के गुर्गे रौब जमाने के लिए छोटी-बड़ी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने से गुरेज नहीं करते हैं। महाकाल ग्रुप के सदस्य शराब व गो तस्करी, सफेद बालू, असलहे लहराना, सुनसान स्थानों पर राहगीरों से मारपीट, मोबाइल फोन रुपये लूटना आदि अपराध करने में शामिल है।
समय रहते पुलिस यदि ऐसे गैंगों पर शिकंजा नहीं कसती है तो 80 व 90 के दशक में विभिन्न थाना क्षेत्रों में सक्रिय रहे दस्यु गैंग के जैसे ही महाकाल ग्रुप पुलिस-प्रशासन के लिए सिरदर्द बन सकते हैं, क्योंकि तत्कालीन समय में थाना क्षेत्र में दस्यु गैंग का जबरदस्त आतंक था। इसी तर्ज महाकाल ग्रुप सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में आतंक मचा रहा है।
सोशल मीडिया पर इस गैंग व ग्रुप में सर्वाधिक कम उम्र के युवा और किशोर हैं जो बड़े पैमाने पर चार पहिया व बाइक से शराब की तस्करी करते है। तस्करी का सामान लेकर बिहार की सीमा में आसानी से दाखिल हो जाते है।