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पूरी होती नहीं दिख रही गंडक नदी पर बांध बनाने की मांग

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बाढ़ के दौरान महदेवा गांव में कटान करती गंडक नदी। फाइल फोटो। - फोटो : KUSHINAGAR
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पूरी होती नहीं दिख रही गंडक नदी पर बांध बनाने की मांग
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फ्लड हाई लेवल कमेटी ने बांध निर्माण की मांग खारिज कर पर्क्यूपाइन लगाने की बात कही
खड्डा(कुशीनगर)। तीन वर्ष से गंडक नदी की कटान के जद में आने से बच रहे महादेवा व सालिकपुर गांव की करीब आठ हजार की आबादी को बाढ़ से बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। क्षेत्र लोगों की यहां बांध बनाने की मांग पूरी होती नहीं दिख रही है। फ्लड हाई लेवल कमेटी ने बांध निर्माण की बात को खारिज करते हुए यहां पर्क्यूपाइन लगाकर गांव को बचाने की बात कही है।
खड्डा ब्लॉक का महदेवा व सालिकपुर गांव नदी पार बाई तरफ एनएच-727 के पनियहवा पुल के पास आबाद है। इनकी सीमा बिहार के बगहा अनुमंडल के सेमरा लबेदहा पंचायत से जुड़ी है। इसके सटे सेमरा लबेदहा पंचायत का भैसहिया और कांटी टोला गांव आबाद है। यह दोनों गांव भी गंडक नदी के निशाने पर हैं। करीब तीन साल पहले गंडक नदी की धारा महादेवा गांव से करीब दो किमी दूर बहती थी। इस जगह पर लोग खेती कर जीवन यापन करते थे, लेकिन नदी ने अचानक रुख बदला और कटान करते हुए उत्तर की तरफ बढ़ने लगी। इससे लगभग डेढ़ हजार एकड़ फसल समेत जमीन नदी में समा गई।
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दो वर्ष पहले नदी महदेवा गांव के करीब पहुंच गई तो लोगों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए यहां तटबंध बनाकर यूपी व बिहार के गांव को बचाने की मांग की, लेकिन इसे ठंडे बस्ते मे डाल दिया गया। अलबत्ता जिला प्रशासन ने बाढ़ खंड की तरफ से कटान रोकने के लिए वैकल्पिक उपाय कराया था। वर्ष 2021 में जब नदी ने गांव की तरफ तेजी से बढ़ना शुरू किया और फासला मात्र 50 मीटर से कम रह गया। इसके बाद जिला प्रशासन पुन: बाढ़ खंड से गांव बचाने के लिए सक्रिय हुआ, लेकिन तमाम प्रयास नाकाफी रहे। इसके बाद बिहार के एक बाढ़ विशेषज्ञ की मदद ली गई और बांस, रस्सी, बोरी आदि के सहारे गांव बचाने का प्रयास चलता रहा। गनीमत रही की नदी की धारा स्वत: धीमी हुई और बाढ़ का वक्त समाप्त हो गया। पिछले माह जीएफसीसी के चेयरमैन शेर सिंह की अगुवाई में दौरा करने आई फ्लड हाई लेवल कमेटी ने बांध बनाने के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए तीन लेयर में 1750 मीटर पर्क्यूपाइन लगाकर कटान रोकने की बात कही है।
‘बांध बनाकर ही गांव को बचाया जा सकता है’
महादेवा के ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा, सालिकपुर के प्रधान रामभजु, पूर्व प्रधान जितेंद्र, रमायन, भीमबली, विनोद, बाढू, रामप्रवेश, सुंदर, नरेश, महातम, श्यामबदन, जवाहिर, सहबर, मंजू, राकेश, तूफानी, भोला, चिरई, मुबारक, शंकर आदि ने कहा कि नदी ने करीब डेढ़ हजार एकड़ फसल समेत जमीन काट दिया है। गांव के सभी परिवार खेती व मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। हर साल बाढ़ का पानी गांव में घुस जाता है। गांव छोड़ एक पखवारे तक ऊंचे स्थान पर शरण लेना पड़ता है। पिछले साल किसी तरह बाढ़ से गांव बच पाया था। बांध बनाकर ही गांव को बचाया जा सकता है। जब बाढ़ आता है और कटान होती है तो प्रशासन हरकत में आता है। जैसे ही बाढ़ समाप्त होता है सब भूल जाते हैं।
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‘धन मिलते ही शुरू करा दिया जाएगा कार्य’
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता मनोरंजन कुमार का कहना है कि कुछ दिन पहले, फल्ड हाई लेबल कमेटी ने दौरा किया था। उनके सामने बांध बनाने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन कमेटी ने इसे नहीं माना। इसकी जगह तीन लेयर में पर्क्यूपाइन लगाकर कटान रोकने की बात कही है। अब तक इस कार्य के लिए धन नहीं मिला है। धन मिलने के बाद कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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