बाढ़ शरणालय छोड़ा, अब चूल्हा जलाने की चिंता
चूल्हे टूटे, लकड़ियां और अनाज गीले, खाना बनाने में हो रही परेशानी
गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते अभी भी भयभीत हैं ग्रामीण
गंडक में डिस्चार्ज कम होने के बाद घर लौट गए हैं बाढ़ पीड़ित
पिपराघाट के कुछ पुरवों में जलभराव से हो रही दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर/छितौनी। बाढ़ शरणालयों में रहने वाले खड्डा क्षेत्र के लोग पानी घटते ही घरों को लौट आए हैं। अनाज तो पहले ही भीग चुके हैं, चूल्हे भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सूखी लकड़ियों का इंतजाम नहीं होने से भोजन पकाने में परेशानी आ रही है। घरों में सिल्ट और कीचड़ भरा है। महिलाएं अनाज, लकड़ियां धूप में डालकर सुखाती नजर आईं। इसके अलावा गंडक नदी के डिस्चार्ज में शनिवार की अपेक्षा रविवार को ज्यादा कमी हुई।
खड्डा ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित गांव महदेवा और सालिकपुर के बाढ़पीड़ित रविवार को घरों की सफाई करते नजर आए। बाढ़ के समय में तो गांव के ऊंचे स्थानों पर बाढ़ शरणालय बना दिया गया था, जहां लोगों को कम्युनिटी किचन के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराया जाता था। लेकिन नदी में पानी का डिस्चार्ज कम होते ही बाढ़ शरणालय बंद कर दिए गए हैं। बाढ़ के साथ आए कीचड़ ने लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। पीड़ितों के घरों में एक से दो फीट कीचड़ भरा हुआ है। बाढ़ शरणालय से आए कुछ लोग घरों की दशा देखकर अभी भी प्राथमिक विद्यालय में तो कुछ दूसरी जगह परिवार समेत ठहरे हैं। रविवार को कई बाढ़ पीड़ितों ने अपनी परेशानी बयां की। महदेवा गांव की निवासी सहोदरा देवी ने बताया कि बाढ़ के बाद घर में कीचड़ पसरा हुआ है। घर में खाने के लिए अनाज नहीं है। सरकारी राशन मिला है, लेकिन बनाकर खाने की जगह नहीं है, जिससे विद्यालय पर रह रही हूं। चिरइया देवी का कहना है कि बाढ़ से ज्यादा अब परेशानी है। बाढ़ में सरकारी सहयोग मिला था, लेकिन अब कम्युनिटी किचन और बाढ़ शरणालय बंद होने से खाने के लाले पड़े हैं। उर्मिला देवी का कहना है कि घर कीचड़ से पटा हुआ है। जाएं तो कहां जाएं। कीचड़ से सने घर में मचान पर रह रही हूं, लेकिन खाना बनाने में दिक्कत हो रही है। बुचिया देवी का कहना है कि घर में मिट्टी का चूल्हा था, जो पानी में बह गया है। सिलेंडर है, लेकिन रुपये नहीं हैं कि गैस भराया जाए। लकड़ी तो है, लेकिन वह भी भीगी हुई है। दो वक्त की रोटी कैसे बनाई जाए, इसे लेकर चिंता हो रही है। सत्तू-भूजा आदि खाकर परिवार का जीवन कट रहा है। वहीं दूसरी ओर बाढ़ प्रभावित महदेवा गांव का रविवार को सपा नेता विजय प्रताप कुशवाहा ने बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना। उन्होंने बाढ़ से बचाव के लिए गाइड बांध बनाए जाने की मांग की। इस दौरान डॉ. मनोज कुशवाहा, पन्नेलाल यदुवंशी, सुभाष साहनी, संजय यादव, रामजी शर्मा आदि मौजूद थे।
क्षतिग्रस्त ठोकर की मरम्मत शुरू
तमकुहीरोड। पिपराघाट गांव के तेजू टोले के सामने नरवाजोत बांध के किमी 1.700 के ठोकर पर पिछले तीन दिनों से गंडक कटान कर रही है। इसकी जानकारी होने पर बाढ़ खंड के अभियंता पहुंचे। उन्होंने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू करा दी। गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज बढ़ने-घटने की वजह से ठोकरों और तटबंधों पर कटान का खतरा बना है। कटान से इससे नरवाजोत, मोतीराय टोला, बुटन टोला, दहारी टोला, तवकल टोला, उपाध्याय टोला, देवनारायन टोला, हनुमान टोला, मुसहरी टोला सहित अन्य कई पुरवों के लोग सहमे हैं। क्योंकि स्थिति नियंत्रण में नहीं आने पर काफी क्षति हो सकती है। यह देखकर कई लोग पलायन भी शुरू कर दिए थे।
कई पुरवों में अभी है बाढ़ का पानी
तमकुहीरोड। पिपराघाट गांव के कई पुरवों में अभी भी गंडक नदी के बाढ़ का पानी घुसा है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को क्षेत्रीय विधायक व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने नाव से देवनारायन टोला और शिव टोले का भ्रमण किया। उन्होंने बाढ़ के पानी से दिक्कतें झेल रहे लोगों का हाल जाना और उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। गंडक नदी की तलहटी का इलाका होने के कारण पिपराघाट के देवनारायन टोला, शिव टोला, मुसहरी टोला, इमिलिया टोला सहित अन्य कई पुरवों में और अहिरौलीदान के डीह टोला में बाढ़ के हालात अभी भी बने हैं। कई सड़कों पर पानी भरा है तो कई टोले बाढ़ के पानी से घिरे हैं। क्षेत्रीय विधायक ने छोटी नाव से बाढ़ प्रभावित शिव टोला व देवनारायन टोला का भ्रमण किया। बाढ़ से घिरे अनिल यादव, राजेंद्र निषाद, ब्रह्मा यादव, मनोज निषाद, वकील यादव, शंभू निषाद, अच्छेलाल, रमेश, श्रीराम, सुरेश सहित अनेक लोगों से हालचाल जाना और लोगों की इस समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। उनके साथ जिला पंचायत सदस्य सुधीर, अनिल पटेल, व्यास कुशवाहा सहित कई लोग मौजूद थे।
पानी में खड़े होकर भोजन करना मजबूरी
घरों में पानी भरे होने के कारण हो रही ज्यादा परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। बच्चों को भूख लगने पर बाढ़ पीड़ित क्षेत्र की माताएं पानी में खड़े होकर खाना खिला रही हैं। तो कुछ बच्चे ऊंचे जगहों पर बैठकर खाना खा रहे हैं। यहां बच्चों पर भी बाढ़ से उपजी परेशानी साफ दिख रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले सबसे ज्यादा बच्चे परेशान हैं। बाढ़ का पानी स्कूल में भर जाने से पढ़ाई पूरी तरह ठप है। रविवार को दिन के लगभग 11 बजे बसंतपुर गांव में बाढ़ का पानी भरा था। गांव की कमलवती देवी के बच्चों को भूख लगी और खाना मांगा। घर के अंदर पानी, बाहर भी पानी होने से कोई ऐसा स्थान नहीं था, जहां बच्चों को बैठाकर खाना खिला सकें। आखिर में मां कमलावती पानी में ही खड़े होकर बच्चों को हाथ में थाली लेकर खाना खिलाने लगीं। इसी गांव में कुछ दूरी पर तीन बच्चे बांस के अवशेष पर बैठे थे। अगल-बगल बाढ़ का पानी बह रहा था। तीनों एक ही थाली में रखे चावल को खा रहे थे। इन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं थी कि जहां बैठे हैं, उसमें सांप या अन्य विषैले कीट भी हो सकते हैं। यह तो बानगी भर है। इन बाढ़ प्रभावित गांवों के अनेक बच्चे इस आपदा में दुश्वारी झेल रहे हैं। हर साल बाढ़ की विभीषिका का सामना करने वाले इन बच्चों का बचपना भी बाढ़ का पानी अपने साथ बहा ले जाता है।