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जान जोखिम में डालकर नाव से खेती करने जाते हैं किसान

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गंडक नदी के पार से खेती-बाड़ी करके नाव से लौटते किसान व मजदूर। - फोटो : KUSHINAGAR
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जान जोखिम में डालकर नाव से खेती करने जाते हैं किसान
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17 किमी क्षेत्र में कोई पुल नहीं, गंडक नदी को पार करना मजबूरी
तमकुहीरोड (कुशीनगर)। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब 17 किमी में फैले एपी बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों को जान जोखिम में डालकर मजदूरी और खेती करने गंडक नदी के उस पार जाना पड़ रहा है। क्योंकि इतनी दूरी में कोई पुल नहीं है। पूर्व में कई बार नाव से नदी पार करते समय हादसे भी हो चुके हैं।
सेवरही क्षेत्र के नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब 17 किमी की लंबाई में एपी बांध फैला हुआ। इसके किनारे बसे नरवाजोत, दहारी, तवकल, परसा उर्फ सिरसिया, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवही दयाल, बिरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी व डीह टोला, अहिरौलीदान सहित कई गांवों के लोगों की खेती गंडक नदी के उस पार है। इस समय क्षेत्र के किसान गन्ना व मक्का सहित अन्य फसल की निराई-गुड़ाई और देखभाल में लगे हैं। 15 जून के बाद बरसात शुरू हो जाने और गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद यह कार्य संभव नहीं होगा।
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किसान चिलचिलाती धूप में भी फसल की देखभाल में लगे हैं। यही हाल मजदूरों का है। ये लोग रोज नावों से गंडक नदी के उस पार मजदूरी करने जाते-आते हैं। एपी बांध के किनारे बसे गांवों के प्रभुनाथ यादव, दूधनाथ शर्मा, ओमप्रकाश निषाद, संजय सिंह, रुस्तम अली, कैलाश सिंह, बृजकिशोर साहनी, शैलेंद्र चौहान, पप्पू सिंह, प्रदीप सिंह आदि का कहना है कि पिपराघाट से अहिरौलीदान के बीच गंडक नदी पर कोई पक्का पुल नहीं है।
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