कुशीनगर। जिले में पशु तस्करी के मामलों में संदिग्ध जमानतदारों के अभिलेखों की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। जमानतदारों के सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद पुलिस ने राजस्व विभाग के उन कर्मचारियों को रडार पर लिया है, जो कागजों पर बिना मानक जांच के सत्यापन कर देते हैं। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि जमानतदारों के फर्जी पते और पहचान को सही बताने में कुछ राजस्वकर्मियों की भूमिका रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार गैर जिलों से सक्रिय पशु तस्करों का एक नेटवर्क कुशीनगर में जमानत करवाने में जुटा हुआ था। आरोप है कि इस नेटवर्क के सहारे कई अभियुक्तों ने फर्जी जमानतदार खड़े कर दिए और दस्तावेजों के सत्यापन में बड़ी लापरवाही हुई। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब सत्यापन की पूरी प्रक्रिया को खंगाला जा रहा है।
कार्रवाई की जद में आए 12 जमानदारों से पूछताछ में इस फर्जीवाड़े की जानकारी पुलिस को हुई तो एसपी के आदेश पर पशु तस्करों को जमानत से पहले अभिलेखों की जांच और सत्यापन करने वाले संबंधित थाने के पुलिस और राजस्कर्मियों पर संदेह गहरा गया है। एसपी ने इनकी भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि सिर्फ राजस्व विभाग ही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मियों ने भी औपचारिकता निभाते हुए सत्यापन कर दिया था। ऐसे में बीट सिपाही से लेकर हल्का दरोगा तक कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। पुलिस विभाग ने प्रत्येक प्रकरण की बिंदुवार जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी सत्यापन कर जमानत प्रक्रिया को गलत दिशा देने वालों पर कार्रवाई होनी तय है।
एसपी केशव कुमार ने कहा कि अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर पशु तस्करों की कोर्ट से जमानत लेने वाले 12 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पूछताछ में कई बातें सामने आई हैं। जेल से रिहा होने से पहले जमानतदारों के कागजातों का सत्यापन संबंधित थाने व राजस्वकर्मी करते हैं, इसमें गड़बड़ी मिली है। इसी का नतीजा है कि एक जमानतदार 30 से 40 बार पशु तस्करों की जमानत लिया है। इसकी जांच कराई जा रही है।