पकवा इनार। बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर में मनोविज्ञान विभाग की तरफ से शुक्रवार को मन रंजन से विरेचन तक विषयक एक दृश्य-श्रव्य जागरूकता कार्यक्रम किया गया। इसमें मनोविज्ञान के विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य के अलग-अलग पक्षों को उजागर करती हुई नाट्य प्रस्तुतियां दीं। जिसमें भंवर, खामोशी, पिंजरा, अंधेरे में रोशनी, कल की परछाईं, छोटी सी बात शामिल रही। यह विश्व मानसिक दिवस पर आयोजित किया गया।
प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्र ने विद्यार्थियों को समस्याओं पर बात करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय का आरम्भ है। असफलता सिर्फ यह बताती है कि आपको अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है।
विषय प्रवर्तन करते हुए पूर्व प्राचार्य प्रो. अमृतांशु शुक्ल ने विरेचन की पृष्ठभूमि को बताया। संचालन छात्र शमशुद्दीन अंसारी ने किया। अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. राम भूषण मिश्र ने किया। अंत में सभी के प्रति डा. सत्यप्रकाश ने आभार ज्ञापित किया।
इस मौके पर प्रो. राजेश सिंह, प्रो. सीमा त्रिपाठी, प्रो. गौरव तिवारी, डॉ. रीना मालवीय, डॉ. वीणा, डॉ. रमेश विश्वकर्मा आदि मौजूद थे।