खड्डा। फर्जी परवाना व आदेश पर खड्डा तहसील के राजस्व अभिलेखों में हुए खेल में शामिल जिम्मेदार खुद को बचाने के लिए जांच का दायरा बढ़ाते जा रहे हैं।
एआरओ कोर्ट गोरखपुर ने सत्यापन के बाद भेजे गए 18 परवानों को फर्जी करार दिया है। बावजूद इसके तहसील प्रशासन रिकॉर्ड रूम में फाइल ढूंढ़ने के नाम पर जांच के नाम पर टाल-मटोल कर रहे हैं। कानून के जानकारों की मानें तो जब मुकदमा चला ही नहीं तो रिकाॅर्ड रूम में फाइल कैसे पहुंच जाएगी। रिकाॅर्ड रूम में फाइल ढूंढने के लिए पहुंची तहसील की टीम से रिकाॅर्ड रूम के जिम्मेदारों ने जाकड़ नंबर मांगे हैं, बिना उसके फाइल ढूंढ़ने से हाथ खड़े कर दिए है। उच्चाधिकारियों को ऐसी ही सूचना देकर खड्डा तहसील प्रशासन गुमराह करने में लगा है। फर्जी परवाना भेज अभिलेख में नाम दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई कराने के बजाए तहसील प्रशासन फाइल व जाकड़ नंबर के पेच में उलझा हुआ है। जांच का विषय तो यह भी है कि जब तहसील में ऑनलाइन मुकदमा नंबर जांच की सुविधा मौजूद है तो किस कारण आंख बंद कर नामांतरण आदेश दे दिया गया।
गोरखपुर सहायक अभिलेख अधिकारी के न्यायालय के नाम से फर्जी तरीके से कूट रचना कर फर्जी नामांतरण परवाना व आदेश की छाया प्रति खड्डा तहसील को भेजी गई और धोखाधड़ी करके राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराना शुरू कर दिया। सत्यापन रिपोर्ट भी फर्जी तरीके से तहसील में पहुंचा दिया और इसे ही सही मानते हुए तहसीलदार ने रजिस्ट्रार कानूनगो को नाम दर्ज करने का आदेश भी दे दिया। इसी आदेश के तहत तीन फर्जी परवाना पर मालिकान रजिस्टर में नाम दर्ज भी हो गया। आईसीसीएमएस पोर्टल पर जांच नहीं की, जबकि यह सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है। पलक झपकते ही इसके बारे में जानकारी की जा सकती है कि सही है या गलत है।
हालांकि, मामला उजागर होने पर तहसीलदार ने जांच की तो मामला गलत पाया। बावजूद इसके अभी तक इस खेल में शामिल लोगों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।