कसया। महर्षि अरविंद विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे गोरक्ष प्रांत के नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के सातवें दिन शनिवार को शिक्षण की नवीन पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें शिक्षकों को अनुभव, प्रयोग और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण कार्य करने की सलाह दी।
प्रदेश निरीक्षक जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत जियालाल ने कहा कि शिक्षण कार्य पंचपदीय विधि एवं क्रियात्मक गतिविधियों पर आधारित होना चाहिए। बच्चों को रटने के बजाय अनुभव, प्रयोग और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा दी जाए, जिससे उनमें विषय की गहन समझ विकसित हो सके। उन्होंने बताया कि पंचपदीय शिक्षण पद्धति पांच चरणों वाली वैज्ञानिक एवं बाल-केंद्रित अधिगम प्रक्रिया है, जिसे राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा भी समर्थन करती है। यह पद्धति विद्यार्थियों में जिज्ञासा, चिंतन और व्यावहारिक ज्ञान का विकास करती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम को संभाग निरीक्षक दिवाकर राम त्रिपाठी, प्रधानाचार्य वृजराज मिश्रा आदि ने संबोधित किया।
इस दौरान फणींद्रनाथ ओझा, रणजीत उपाध्याय, अशोक मिश्रा, अमित राव, धर्मेंद्र ओझा, महेंद्र सिंह, राजन राव, अरुण पांडेय, धीरज पांडेय, प्रद्युम्न पटेल, सोहन साहू, ओमप्रकाश भारती आदि मौजूद रहे।