निजीकरण के विरोध में अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन करते बिजली कर्मी-स्रोत बिजली निगम
संतकबीरनगर। बिजली निगमों के निजीकरण के विरोध में बृहस्पतिवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने अभियंताओं के वेतन से मरम्मत खर्च की रिकवरी कराए जाने के निर्णय पर आक्रोश जताया। बिजली कर्मियों ने कहा कि जब तक निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता है तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी ई. राजेश कुमार ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण का रास्ता साफ करने के लिए सुनियोजित तरीके से बिजली कर्मियों और अभियंताओं का उत्पीड़न कर रहा है। वेतन से रिकवरी का आदेश उसी कड़ी का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों में भय का माहौल बनाना है।
उन्होंने कहा कि ट्रांसफाॅर्मरों के क्षतिग्रस्त होने के कई तकनीकी कारण होते हैं, जिनमें ओवरलोडिंग प्रमुख है। ओवरलोडिंग की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की होती है, क्योंकि पर्याप्त क्षमता के ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराना और लोड प्रबंधन करना उसी के दायरे में आता है। बिना किसी तकनीकी जांच के सामान्य आदेश के माध्यम से अभियंताओं पर आर्थिक दंड थोपना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी दिलीप सिंह ने कहा कि अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों पर ट्रांसफाॅर्मर ओवरलोड हो रहे हैं और उनके उच्चीकृत करने का बिजनेस प्लान में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में अभियंताओं के वेतन से रिकवरी का आदेश डर और दमन का वातावरण बनाने के लिए किया गया है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
धरने में ई. मुकेश गुप्ता, मनोज यादव, प्रिंस गुप्ता, संतोष गुप्ता, अमरनाथ यादव, नारायण चंद्र चौरसिया, भास्कर पांडेय, श्रवण प्रजापति आदि मौजूद रहे।