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Kushinagar News: ट्रेन में यात्रियों का रेला...खड़े-खड़े यात्रा में सूज गए पैर, परिवार हुआ परेशान

Tue, 03 Mar 2026 10:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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कप्तानगंज रेलवे स्टेशन पर सत्याग्रह एक्सप्रेस पहुंचते ही जुटी भीड़।संवाद
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पडरौना/कप्तानगंज। होली और शादी समारोह में शामिल होने बड़े शहरों से घर आने वाले लोगों की परेशानी मंगलवार को भी कम नहीं दिखी। बंगलुरू और दिल्ली से कप्तानगंज तक खड़े-खड़े यात्रा करने में लोगों के पैर सूज गए। जनरल बोगी की बात कौन कहे, आरक्षित बोगियों की स्थिति यात्रियों की भीड़ के चलते जनरल बोगी जैसी दिखी। यात्रियों की हालत यह थी कि उनके ट्रेन में खड़े-खड़े उनके पैर तक सूज गए। परिवार के साथ आने वाले लोगों की परेशानी सबसे अधिक थी।
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यात्रियों का कहना था कि ट्रेन में भीड़ इतनी थी कि जरूरत पड़ने पर बाथरूम तक जाने में मशक्कत करनी पड़ी। यात्री जब अपने स्टेशन पर पहुंचे तब राहत की सांस ली। ट्रेनों में बेहिसाब भीड़ की वजह से कन्फर्म टिकट होने के बाद भी लोगों की यात्रा मुश्किलों भरी रही। आरक्षित टिकट लेकर यात्रा करने वाले लोगों को किसी तरह सीट तो मिल गई, लेकिन सीट से उठकर बाथ रूम और रेलवे स्टेशन पर खाने-पीने का सामान लेना बड़ी चुनौती रही। शिकायत के बाद भी उनकी समस्या टीटी और जीआरपी के कर्मचारी निस्तारित नहीं कर पा रहे थे।
कप्तानगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर सुबह 4:38 बजे पहुंची सप्तक्रांति सुपर फास्ट ट्रेन से उतरे अजय वर्मा, दुर्गेश कुमार, विशाल ने बताया कि 1881 किलोमीटर लंबी उनकी यात्रा बहुत ही मुश्किल रही। भीड़ के चलते सीट से उठना मुश्किल था। सत्याग्रह एक्सप्रेस से दिल्ली से जनरल कोच में यात्रा कर आए दीनानाथ, मंगेश, अवधेश पाठक आदि ने बताया कि 754 किलोमीटर लंबी यात्रा में उनके पैर सूज गए हैं। पूरे शरीर में दर्द हो रहा है।
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बंगलुरू में निजी कंपनी में इंजीनियर हूं। वहां से गोरखपुर और गोरखपुर से कप्तानगंज तक ट्रेन से आया हूं। कन्फर्म टिकट होने बाद भी एसी कोच की दशा जनरल बोगी जैसी थी। पूरी 1896 किलोमीटर की यात्रा बैठकर पूरी की है। -सुजीत राज चौरसिया, कप्तानगंज।
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भोपाल से बीटेक की पढ़ाई करता हूं। कन्फर्म टिकट नहीं मिलने के कारण वेटिंग टिकट पर 854 किलोमीटर यात्रा किया हूं। ट्रेन में बेशुमार भीड़ थी। कन्फर्म टिकट नहीं होने के कारण वापस लौटने की हिम्मत नहीं हो रही है। -पीयूष सिंह, कोटवा।


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50 की जगह 500 रुपये में बुक कर वाहन से घर पहुंचे लोग
पडरौना। होली की खुशियां मनाने घर लौट रहे यात्रियों को स्टेशन पर उतरने के बाद भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ट्रेन और बसों से पहुंचने पर उन्हें गंतव्य तक जाने के लिए रोडवेज बसें नहीं मिल रहीं। नजदीकी गांवों के लोग ऑटो बुक कर या ई-रिक्शा का पूरा भाड़ा देकर किसी तरह घर पहुंच रहे हैं। 30 से 40 किलोमीटर दूर कस्बों और गांवों के यात्रियों को भोर होने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
होली पर मंगलवार को पडरौना बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही दिल्ली, मेरठ, पंजाब, मुंबई से लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। आसपास के क्षेत्रों में जाने वाले लोग ऑटो बुक कराकर रवाना हो गए। परिवहन निगम की बस नहीं मिलने से दुदही, जटहां बाजार, रामकोला आदि दूरस्थ स्थानों की ओर जाने वाले यात्रियों को मजबूरन 10 किलोमीटर के लिए 400 और 15 से 20 किमी दूर गांव जाने के लिए 600 से 700 रुपये किराया देना पड़ा।

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करीब आठ माह बाद गुजरात से होली पर घर आया हूं। गोरखपुर तक तो ट्रेन और गोरखपुर से पडरौना तक बस से आया हूं। अब यहां से घर जाने के लिए सवारी नहीं मिल रही है। रोडवेज की बस भी नहीं है। परिवार के साथ होने के चलते मजबूरन 700 रुपये में टेंपो बुक किया हूं। -प्रेम राम निवासी, जटहां बाजार।

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गुजरात की एक फैक्ट्री में काम करता हूं। किसी तरह ट्रेन से गोरखपुर तक तो आ गया। वहां काफी प्रतीक्षा के बाद पडरौना के लिए बस मिली। अब पडरौना से घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है। थोड़ी देर और प्रतीक्षा करूंगा। यदि साधन नहीं मिला तो टेंपो ही बुक करूंगा। -राहुल कुमार, निवासी जटहां बाजार।
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कप्तानगंज रेलवे स्टेशन पर सत्याग्रह एक्सप्रेस पहुंचते ही जुटी भीड़।संवाद

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