सवालों के घेरे में कोरोना जांच, जवाब ढूंढने आई टीम
रोजगार के सिलसिले में बाहर जाने वालों को रिपोर्ट देने की आशंका
टारगेट पूरा करने को लेकर भी फर्जी रिपोर्ट बनाने को लेकर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जनपद में एक दिन के भीतर 20 व्यक्तियों की कोविड जांच रिपोर्ट आना और उसमें भी 17 के नाम, पते और संपर्क नंबर फर्जी होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में जनपद स्तर पर जांच के बाद बड़ी कार्रवाई तो हुई ही है, मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय से भी दो सदस्यीय टीम जांच करने पहुंची। टीम जांच रिपोर्ट को लेकर अपनी छानबीन में जुटी है। फर्जी जांच रिपोर्ट को लेकर ज्यादा संदेह रोजगार के सिलसिले में विदेश और बड़े शहरों में जाने वाले लोगों की फर्जी कोविड जांच रिपोर्ट और टारगेट पूरा करने के लिए गलत नाम-पते दर्शाने को लेकर जताया जा रहा है। कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए कांटैक्ट और ट्रेसिंग पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा कोविड के लक्षण वाले ज्यादा से ज्यादा लोगों को ट्रेस कर उनकी कोविड जांच कराने का निर्देश दिया गया है। जनपद में प्रतिदिन 1850 लोगों का कोरोना जांच करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सात अगस्त की देर शाम 20 लोगों की एक दिन में कोरोना संक्रमित रिपोर्ट तैयार किए जाने और उसमें भी 17 फर्जी मिलने के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, जिस पर जिला प्रशासन का ध्यान भी नहीं था। कोविड महामारी की दूसरी लहर गुजरने के बाद विदेश अथवा बड़े शहरों में रोजगार अथवा नौकरी करने वाले लोगों को वहां फिर से काम पर लौटने के लिए कोविड जांच रिपोर्ट निगेटिव प्रस्तुत करना अनिवार्य है। संदेह जताया जा रहा है कि इसकी औपचारिकता पूरी करने के लिए बहुत से लोग स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों से मिलकर फर्जी रिपोर्ट बनवा लिए हैं। उनमें से ही कुछ मामले इस रिपोर्ट से भी जुड़े हो सकते हैं। इसके अलावा कोविड जांच के मिले लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी फर्जी नाम, पते और मोबाइल नंबर रिपोर्ट में भरकर औपचारिकता निभाने का संदेह जताया जा रहा है। इन्हीं सवालों का जवाब ढूंढने स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय से दो सदस्यीय टीम मंगलवार को दोपहर बाद जिले में पहुंची।
इस बाबत सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि दो सदस्यीय टीम जिले में आई है, जो कोविड जांच रिपोर्ट के संबंध में जानकारी ले रही है, लेकिन उन लोगों से मुलाकात नहीं हो पाई है। इस वजह से उनका नाम पता नहीं चल पाया है।
कोविड जांच रिपोर्ट फर्जी क्यों बनाई गई है, इसका अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है। क्योंकि जो लोग नहीं हैं, उनके नाम से भी रिपोर्ट बना दी गई है। उनका कहना है कि ज्यादातर संभावना जताई जा रही है कि रोजगार के सिलसिले में विदेश अथवा बड़े शहरों में जाने वाले लोगों के लिए फर्जी कोविड जांच रिपोर्ट बनाई गई है। दूसरा संदेह यह हो रहा है कि 1850 सैंपल की प्रतिदिन जांच का टारगेट पूरा करने के लिए फर्जी नाम-पते डाले जा रहे हों। सभी बिंदुओं पर जांच हो रही है। स्वास्थ्य विभाग से दो सदस्यीय टीम के आने की जानकारी हुई है, लेकिन वे अभी मिले नहीं हैं। उस टीम के सदस्य भी इसी सिलसिले में आए हैं।
- एस. राजलिंगम, डीएम