जौरा बाजार केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नदारद, सहायिका मिली रही उपस्थित
केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष उपस्थिति मिली बेहद कम
पडरौना। कुशीनगर जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई केंद्रों के पास अपने भवन नहीं हैं और वे प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों की अतिरिक्त कक्षाओं में चल रहे हैं। जर्जर भवनों, पेयजल और शौचालय की कमी के साथ-साथ पंजीकृत बच्चों की कम उपस्थिति इन केंद्रों की बदहाली को दर्शाती है।
जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा सुधर नहीं रही है। अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण युक्त खाद्य सामग्री देने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही शिशु एवं मातृ सेहत के लिए भी योजनाएं संचालित हो रही हैं। इन केंद्रों पर पोषाहार व आरबीएसके टीम की तरफ से शिविर लगाकर दवाएं देने के अलावा बच्चों को पढ़ाया जाता है।
वर्तमान में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों के संख्या के मुताबिक बैठने की उचित व्यवस्था, शौचालय, शुद्ध पेयजल सहित स्वच्छता का काफी अभाव है। बुधवार को जिले के फाजिलनगर, मोतीचक और हाटा विकास खंड क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल में यह सब देखने को मिली। फाजिलनगर विकास खंड के जौरा बाजार आंगनबाड़ी केंद्र पर तैनात कार्यकर्ता नदारद रहीं। सहायिकाएं केंद्र को संचालित करती हुईं मिलीं। केंद्र पर पंजीकृत कुल 24 बच्चों में से सिर्फ आठ ही बच्चे मौजूद थे। यहां पेयजल और शौचालय के लिए इंतजाम नाकाफी मिला। कंपोजिट विद्यालय के संसाधनों का उपयोग किया जा रहा था।
मोतीचक विकास खंड के आंगनबाड़ी केंद्र पकड़ी मदरहा में बच्चों के पीने के लिए पानी का इंतजाम नहीं था तो वहीं शौचालय भी बदहाल स्थिति में मिला। यहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रंभा देवी, उर्मिला सिंह, संगीता देवी मौजूद नहीं रहीं। सिर्फ सहायिका रेनू राव उपस्थित रहीं। केंद्र पर पंजीकृत बच्चों की संख्या नहीं बताई पाई। हालांकि केंद्र पर सिर्फ चार बच्चे मौजूद थे।
आंगनबाड़ी केंद्र हरपुर बरवां में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शीला सिंह, माधुरी सिंह, रेनू मौजूद नहीं थीं। केंद्र पर राजपति, बताशी, सकीला खातून ने बताया कि कार्यकर्ता मीटिंग में गई हैं। केंद्र पर सिर्फ आठ बच्चे ही उपस्थित थे। पेयजल और शौचालय के लिए केंद्र पर कोई इंतजाम नहीं था।
आंगनबाड़ी केंद्र बेलवा सुदामा में पंजीकृत 40 बच्चों में से एक भी बच्चा नहीं मिला। केंद्र पर कमरे में टीकाकरण का कार्य चल रहा था। यहां तैनात कार्यकर्ता कमलावती देवी मौजूद रहीं। वहीं तैनात सहायिका संध्या शर्मा की तबीयत खराब होने के घर चली गई थीं।
हाटा विकास खंड के भगत छपरा आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन जर्जर मिला। जिस पर ताला लटक रहा था। केंद्र का संचालन कंपोजिट विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष में चलता हुआ मिला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रीना प्रजापति ने बताया कि केंद्र पर कुल 59 बच्चे पंजीकृत हैं लेकिन हर रोज सिर्फ 15 से 18 बच्चे ही आते हैं। सहायिका नंदिनी सिंह मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि केंद्र पर बच्चों को खेलने के लिए खिलौना व कोई उपकरण नहीं है। कई बार मांग की गई लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं हो सका है।
वर्जन
आंगनबाड़ी केंद्रों तक बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना विभाग की प्राथमिकता में शामिल है। जिले में करीब 600 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पेयजल के लिए जल निगम की तरफ से चहारदीवारी के बाहर तक पाइप लाइन बिछाई गई है लेकिन केंद्रों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। तब तक परिषदीय विद्यालयों में उपलब्ध पेयजल व्यवस्था का ही प्रयोग किया जाएगा।
एके दूबे, जिला कार्यक्रम अधिकारी, कुशीनगर