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शहर हो या देहात, हर जगह मच्छरों की भरमार

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शहर हो या देहात, हर जगह मच्छरों की भरमार
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सफाई और फॉगिंग के दावों को झूठा साबित कर रहे हालात
नालियों और सार्वजनिक स्थलों पर कूड़े व गंदगी के ढेर
कुशीनगर। बढ़ती गर्मी के साथ मच्छरों की फौज भी बढ़ रही है। शहर से लेकर गांव तक मच्छरों से लोग परेशान हैं। इक्का-दुक्का जगह की बात छोड़ दें तो कहीं भी मच्छररोधी दवा का छिड़काव नहीं हो रहा है। इससे न केवल मच्छरों की तादाद बढ़ रही है, बल्कि मच्छरजनित रोगों के फैलने की आशंका बनी हुई है। कहीं कागजों में तो कहीं औपचारिकता दिखाकर दायित्व से इतिश्री कर ली जा रही है।
पडरौना नगर पालिका क्षेत्र में 25 वार्ड पहले से हैं। नगर विस्तार के बाद 18 ग्राम पंचायतें और शामिल हो गई हैं। सफाई के संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। नगर पालिका प्रशासन की मानी जाए तो दो अप्रैल से ही वार्डों में मच्छररोधी दवा का छिड़काव शुरू करा दिया गया है, जो 16 जून तक चलेगा। नगर पालिका प्रशासन की तरफ से सफाई कराई गई है, लेकिन कई मोहल्ले और स्थल ऐसे हैं, जहां की तस्वीरें नियमित सफाई की पोल खोल रही हैं। सुभाष चौक से बलुचहां मार्ग के बीच कई जगह नालियां कूड़े-करकट से पटी हैं। जलनिकासी का समुचित इंतजाम नहीं है। इससे उन नालियों में मच्छर पनप रहे हैं। छावनी पूर्वी, रफी अहमद किदवईनगर, गायत्रीनगर, लाला टोला, मोगलपुरा में भी कई स्थानों पर खासकर आबादी वाले क्षेत्रों में नियमित सफाई नहीं हो पा रही हैै। शाम और रात की बात कौन कहे, दिन में भी मच्छर काटने लगते हैं। सोनारी मोहल्ला, छुछियागेट से दरबार रोड पर भी नालियों की सफाई नहीं दिखी।
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कोट
मच्छररोधी दवाओं के छिड़काव में डीजल और मैलाथियान लिक्विड का प्रयोग होता है। करीब 2,500 से 3,000 रुपये एक दिन में मच्छररोधी दवा के छिड़काव पर खर्च होते हैं। यदि क्षेत्र बड़ा है तो खर्च बढ़ जाता है। यदि क्षेत्र छोटा है तो खर्च कम लगता है। बारी-बारी सभी वार्डों में मच्छररोधी दवा का छिड़काव कराया जाता है। दो अप्रैल से मच्छररोधी दवा का छिड़काव शुरू हुआ है और 16 जून तक चलेगा। नगर के विस्तारीकरण वाले क्षेत्रों में मच्छररोधी दवा का छिड़काव कराया जाता है।
एएन सिंह, ईओ, नगर पालिका पडरौना
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