कुशीनगर। महापरिनिर्वाण मंदिर में शुक्रवार को देश-विदेश से आए बौद्ध श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर चीवर चढ़ाकर कर विश्व में सुख, शांति, समृद्धि और मानव कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में श्रद्धा और आस्था का माहौल बना रहा। पूजा-अर्चना का संचालन बौद्ध भिक्षु भंते अशोक ने कराया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों और कुशीनगर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि कुशीनगर वही पावन स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इसी कारण यह स्थान विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। श्रद्धालुओं ने महापरिनिर्वाण मंदिर में स्थित भगवान बुद्ध की शयन मुद्रा वाली प्रतिमा के दर्शन किए और ध्यान लगाकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। इस दौरान उन्होंने बुद्ध के बताए करुणा, अहिंसा और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया।
भंते अशोक ने पर्यटकों को कुशीनगर के अन्य महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और ऐतिहासिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुशीनगर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान रखता है।
पूजा-अर्चना और दर्शन के उपरांत पर्यटक दल शाम को नेपाल स्थित लुंबिनी के लिए रवाना हो गया। श्रद्धालुओं ने कुशीनगर की पवित्र भूमि पर आकर प्रसन्नता व्यक्त की और यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक मौजूद रहे।