पडरौना। बांस नदी और गंडक के बीच फंसे दोआबा क्षेत्र के 10 गांव के लोग इस साल भी चार महीने तक बाढ़ की विभीषिका झेलेंगे। जून से सितंबर तक इन गांवों का संपर्क पूरी दुनिया से कट जाता है। नाव ही इनका एकमात्र सहारा है। गोला घाट पर पुल बनाने का मुद्दा सालों से फाइलों में धूल खा रहा है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। नतीजा बीमार को अस्पताल, बच्चों को स्कूल और किसानों को मंडी तक पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के दोआबा में बसे ये 10 गांव प्राकृतिक खूबसूरती के बीच बसे हैं, पर प्रशासनिक उपेक्षा की मार झेल रहे हैं। एक तरफ बांसी नदी की तेज धारा, दूसरी तरफ गंडक का कटाव। बीच में बसे इन गांवों के करीब 15 हजार से अधिक लोग हर साल आने वाले बाढ़ की विभीषिका को झेलते हैं। गोला घाट के पास रहने वाले 60 वर्षीय रामनरेश यादव कहते हैं बाढ़ आते ही उनका गांव क्षेत्र से कट जाता है। दवा लेने जाना हो तो नाव का इंतजार करो। किराया 50-100 रुपये एक तरफ देकर नदी पार करनी पड़ती है। यदि नदी उफन जाए तो तीन-तीन दिन भूखे रहना पड़ता है। भौगोलिक रूप से ये इलाका बेहद उपजाऊ है। गंडक और बांस के बीच की तलहटी में गेहूं, धान और गन्ने की फसल लहलहाती है। पर बाढ़ के 4 महीने यहां की खेती बर्बाद हो जाती है। कटाव से हर साल दर्जनों बीघा जमीन नदी में समा जाती है।
तमकुहीरोड संवाद के अनुसार, सेवरही विकास खंड के गांव पिपराघाट मुस्तकिल स्थित गोलाघाट के बांसी नदी में लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी की तरफ से पीपे के पुल का निर्माण कराया गया। लेकिन, बरसात के जिन चार महीनों में इसकी सर्वाधिक आवश्यकता होती है, उसी समय विभाग इसे खोलवा देता है। बरसात के समय लोगों को छोटी नाव से नदी पार करनी पड़ती है। लोगों की इस समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए तमकुहीराज विधायक डॉ. असीम कुमार की पहल पर सरकार ने 25.70 करोड़ की लागत से पक्का पुल और पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है, लेकिन पुल निर्माण का कार्य अभी तक शुरू नही हुआ है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि दस दिन बाद मानसून शुरू हो जाएगा। उस अवधि में प्रस्तावित पुल का निर्माण संभव नही होगा। अब बीते वर्षों की तरह इस साल भी बरसात के मौसम में उन्हें दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा। क्षेत्र के यमुना सिंह, सरल शर्मा, ध्रुव निषाद, शिवजी रजक, विश्वनाथ चौधरी, शंभु निषाद आदि का कहना है कि जब तक बांसी नदी पर पक्का पुल का निर्माण नही होगा, तब तक यह समस्या जस की तस बनी रहेगी।
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गोलाघाट के बांसी नदी पर बना पीपे का पुल बरसात में चार माह के लिए खोल दिया जाता है। ऐसे में लोगों के साथ पढाई-लिखाई के लिए सेवरही आने वाले जोगनी, बुटन टोला, इमिलिया टोला, शिव टोला सहित अनेक गांवों के विधार्थियों की परेशानी बढ़ जाती है। उन्हें छोटी नाव से नदी पार करनी पड़ती है। यही नहीं जोगनी गांव में बने न्यू पीएचसी का संपर्क भी कट जाता है, जिसके चलते लोगों को इलाज कराने में दिक्कत होती है। -राजकिशोर निरंकारी, निवासी, गोला घाट।
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गोलाघाट स्थित पीपा का पुल खुल जाने से बांसी नदी को पार करने के लिए छोटी नाव ही एक मात्र सहारा होता है। यदि अन्य विकल्प की बात करें तो बांसी नदी के उस पार जाने के लिए पिपराघाट और ठकरहा के रास्ते सड़क से जाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आठ से दस किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। -जयप्रकाश यादव, निवासी, राजपुर खास।
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छह नाविकों में वितरित किए गए 60 लाइव जैकेट
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गोलाघाट पर बृहस्पतिवार को तहसील प्रशासन की तरफ से नाविकों में लाइव जैकेट वितरित की गई। क्षेत्रीय विधायक ने छह नाविकाें को 60 लाइव जैकेट दिए। उन्होंने कहा कि बरसात में गोलाघाट स्थित बांसी नदी का पीपे का पुल हटाने के बाद नाव से लोगों को नदी पार कराने वाले नाविकों और नाव सवार लोगों की सुरक्षा में मदद करेगा।
तमकुहीराज विधायक डॉ. असीम कुमार ने क्षेत्र के गौरीशंकर, संजय, रामधनी, ध्रुप चौहान, प्रहलाद और महंथ समेत छह नाविकाें में जैकेट वितरित किया। उन्होंने कहा कि बरसात में नदियों का जल स्तर बढ़ने के बाद नाविकों और नाव सवार लोगों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो जाता है। इसी दुर्घटना को रोकने और लोगों की सुरक्षा को लेकर शासन द्वारा सभी नाविकों को लाइफ जैकेट दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक नाविक हमेशा अपनी नाव पर 10 जैकेट अवश्य रखे। नाव सवारों को लाइफ जैकेट पहना कर ही नदी पार कराए। तमकुहीराज एसडीएम आकांक्षा मिश्रा ने कहा कि प्रायः यह देखा जाता है कि बाढ़ के समय स्थिति खराब हो जाती है। बरसात के समय नदी पार करने में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में इस जैकेट के इस्तेमाल से नाविकों और नाव सवारों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
इस दौरान प्रभारी राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता, प्रमोद कुमार सिंह, राजकिशोर निरंकारी, रामाजी निषाद, अजय चौबे, श्रीराम निषाद, कृष्णा निषाद, रमेश ब्याहुत, रामनरेश मिश्र, ध्रुव निषाद, पारस निषाद, जेपी यादव, पन्नालाल यादव आदि मौजूद रहे।