तिलक चौक, गुदरी बाजार, वाल्मिकीनगर और रामकोला रोड स्थित आवासीय और व्यावसायिक भवन हैं जर्जर
दीवारों में दरारें और छज्जों का पलस्तर उखड़ने से हादसे की आशंका
हर बरसात में जारी होता है अलर्ट, लेकिन नहीं होती कोई सकारात्मक कार्रवाई
पडरौना। शहर की पुरानी इमारतें अब सिर्फ बीते दौर की कहानी नहीं बल्कि हादसे का खतरा बनती जा रही हैं। तिलक चौक, मछली बाजार, गुदरी बाजार, स्लॉटर हाउस, साहबगंज, छावनी समेत अन्य पुराने मोहल्लों में कई मकान और व्यावसायिक भवन ऐसे हैं, जिनकी दीवारों से ईंटें झांक रही हैं और पलस्तर जगह-जगह उखड़ चुका है। हर बरसात में अलर्ट जारी होने के बाद कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है। प्रशासन के द्वारा हर साल संबंधित मकान मालिकों को नोटिस जारी की जाती है। जुलाई 2026 में 15 भवन मालिकों को नोटिस जारी किया गया।
जनपद में कई जर्जर भवनों के कारण हादसे की आशंका बनी हुई है। पुराने भवनों के छज्जे जर्जर हैं तो कहीं दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। इन भवनों के आसपास से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं और कई जगह नीचे दुकानें भी संचालित हो रही हैं। ऐसे में कमजोर दीवार या छज्जे का कोई हिस्सा अचानक गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे भवनों के आसपास रहने वाले लोग आंधी और तूफान के दौरान हादसे की आशंका से सिहर उठते हैं और सतर्क हो जाते हैं। हालांकि इन घरों और दुकानों में रहने वाले लोग बेफिक्र हैं।
करीब चार वर्ष पहले नगर के तिलक चौक स्थित एक पुराना भवन गिर गया था। इसमें दबकर एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। गनीमत थी कि किसी की जान नहीं गई। इसके बाद भी अधिकारी नहीं चेते। सिर्फ मकान खाली कराने का नोटिस देकर खामोश हो गए। जबकि जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत खंडहर बने घर को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है।
जानकारी के मुताबिक, तिलक चौक स्थित तीन भवन के दुकानदारों में किरायेदारी को लेकर विवाद है। यह विवाद लंबे समय से है। कम किराया होने के चलते यहां रहने वाले लोग घरों को खाली नहीं करना चाहते हैं। लेकिन इन घरों के पड़ोसी परेशान हैं। क्योंकि अगर से घर गिरे तो नुकसान उनकी छतों को भी होगा। तिलक चौक स्थित खंडहर बने घर के एक पड़ोसी ने कहा कि जब भी तेज बारिश या हवा चलती है तो परिवार के लोग सहम जाते हैं।
तिलक चौक के पास करीब तीन जर्जर भवन हैं। शहर के सबसे भीड़-भाड़ वाले इलाके में शुमार तिलक चौक से रोज करीब 25 से 30 हजार लोगों की आवाजाही होती है। लेकिन हर बार बरसात में अलर्ट जारी कर सिर्फ खानापूर्ति कर ली जाती है। इन भवनों में दुकान किए लोगों को भी किसी तरह का डर नहीं है। इस चौराहे पर एक जर्जर भवन में करीब-करीब छह और दूसरे में तीन दुकानें हैं। यहां दुकान करने वाले लोग बेफिक्री से व्यापार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मकान ऊपर से दिखने में जर्जर है, जबकि नींव इसकी बहुत मजबूत है। उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं लगता।
वहीं शहर के छुछिया गेट के पास चीनी मिल की तरफ से बने तिकोना मकान भी अब जर्जर हो गया है। इसमें बने कई ऐसे कमरे हैं, जिसमें हल्की बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। चीनी मिल के कर्मचारी आज भी इसमें रहते हैं, वहीं भूतल पर बने कमरों में सड़क की तरफ से कई दुकानदार दुकान चलाते हैं। यही हाल शहर के रामकोला रोड स्थित तुलसी कटरा है। इसमें नगर पालिका की तरफ से 50 से अधिक दुकानें बनवाई गई हैं। काफी पहले बने नगर पालिका के इस व्यावसायिक भवन का समय पर मरम्मत नहीं होने जर्जर हो गया है। 20 से अधिक दुकानें तो ऐसी हैं, जिसको लोग खाली कर चुके हैं। उसमें आसपास के दुकानदार कबाड़ रखते हैं।
कटरे में जो दुकानें थोड़ी कम जर्जर हैं, उसमें करीब 20 लोग अपनी दुकानें संचालित करते हैं। हालांकि इस कटरे में बाइक मरम्मत, वेल्डिंग, मोटर पार्ट्स, बेयरिंग आदि की दुकानें संचालित होती हैं। यहां शहर के अन्य व्यावसायिक कटरों की भीड़ तो नहीं है, फिर भी हर दिन 700 से 800 लोगों का आवाजाही बनी रहती है। यदि यह जर्जर भवन किसी वजह से गिरता है तो निश्चित पर अनहोनी होना तय है।
स्पीकअप
दुकान में लोहे का पिलर लगा है। इसी पर पूरा भवन टिका है। ऐसे में भवन ऊपर से जर्जर तो है, लेकिन असुरक्षित नहीं है। मुझे तो भूकंप या आंधी में गिरने का डर नहीं लगता है।
- सुखारी विश्वकर्मा, दुकानदार, तुलसी मार्केट।
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घर के ऊपर का हिस्सा जर्जर जरूर हो गया है, लेकिन इसके नीचे लोहे का गाटर लगा हुआ है। इससे इसकी नींव बहुत मजबूत है। बारिश के दौरान इसके गिरने का डर नहीं है।
-श्रीराम, दुकानदार, तुलसी मार्केट।
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हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा। जब भी तेज हवा चलती है या कई दिनों तक बारिश होती है तो दुकान पर आने में डर लगता है। लेकिन नगर पालिका का कटरा होने से अपने स्तर पर उसकी मरम्मत भी नहीं कराई जा सकती है।
-संजय जायसवाल, दुकानदार, छुछिया गेट।
नगर निगम या जिला प्रशासन को जर्जर भवन की चिंता ही नहीं। लंबे समय से चौराहे का भवन जर्जर है। शहर के तिलक चौक पर दुर्गा पूजा होती है। भीड़ भी खूब होती है। अगर यह गिर गया तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
-रवि वर्मा, राहगीर।
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वर्जन
तिलक चौक स्थित जर्जर मकानों में विवाद है। न्यायालय में मामला विचाराधीन है। इस मामले को सुलझाने के लिए प्रभावी पैरवी कराई जा रही है। रामकोला रोड स्थित जर्जर पड़े तुलसी मार्केट को नए सिरे निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके अलावा शहर में जो जर्जर आवासीय भवन स्वामियों को नोटिस भेजा गया है। उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यदि भवन स्वामी आवास के लिए आवेदन करें तो उनका आवास स्वीकृत करवा दिया जाएगा।
- विवेक कुमार मिश्र, एसडीएम, पडरौना