शहीद जवानों की याद में 13 महादानियों ने किया रक्तदान
- रक्तदान कर जरूरतमंद, मरीज और असहायों की मदद के लिए आगे आए लोग
- जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में आयोजित हुआ स्वैच्छिक रक्तदान शिविर
- अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से किया गया था आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर सोमवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें 13 महादानियों ने शहीद जवानों की याद और असहाय, बीमार एवं जरूरतमंद लोगों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान किया।
सोमवार सुबह दस बजे अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से आयोजित शिविर का जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके वर्मा ने फीता काटकर शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। देश में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है। क्योंकि वर्ष 1999 में 60 दिनों तक भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच चले युद्ध के बाद 26 जुलाई को भारत को जीत मिली थी। कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद भारतीय जवानों के सम्मान में मनाया जाता है। ऐसे में अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से रक्तदान शिविर का आयोजन करना सराहनीय पहल है।
इस रक्तदान शिविर के आयोजन में ब्लड बैंक के नोडल अधिकारी डॉ. एके द्विवेदी, चिकित्साधिकारी डॉ. ऐश्वर्य कुमार वर्मा, पैथालॉजिस्ट डॉ. वाईके सिरोहिया, वरिष्ठ परामर्शदाता एजाज अहमद, एसएलटी एलपी गुप्ता, एलटी विंध्यवासिनी पांडेय, वार्ड ब्वॉय विवेक सिंह, विनोद, सुरेंद्र आदि ने योगदान किया। इनके साथ-साथ प्रवासी भारतीय मदद समूह कुशीनगर के संस्थापक अरविंद सागर का भी विशेष योगदान रहा, जिनके संगठन के दो सदस्यों सुनील कुमार पटेल और शहाबुद्दीन ने आकर रक्तदान किया।
इन महादानियों ने किया रक्तदान
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर जिन महादानियों ने रक्तदान किया, उनमें प्रेमनगर पिपरा के निसार अंसारी, जौराबाजार के नोनियापट्टी टोला निवासी खुर्शेद आलम, अमवाखास के दशहवा टोला निवासी सुनील सिंह पटेल, परसौनी के शहाबुद्दीन अंसारी, सिधावें के आदित्य कुमार सिंह, कठकुइयां के विजय कुमार चौहान, गांगीटीकर गांव के अजय कुमार सिंह, टीकमपार के भगवती सिंह, खैरटवा के रामसनेही सिंह, कुस्महा के विरेंद्र यादव, रगड़गंज के केशव, लक्ष्मीगंज के धनंजय सिंह और तिरमासाहुन गांव के ध्रुप सागर शामिल थे।
एक हादसे ने बदल दी सोच
सोमवार को शिविर में रक्तदान करने आए जौरा बाजार के नोनियापट्टी निवासी 32 वर्षीय खुर्शेद आलम के साथ हुए एक हादसे ने उनकी सोच बदल दी। उसके बाद से दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए दो बार रक्तदान कर चुके हैं।
खुर्शेद ने बताया कि वर्ष 2011 में स्कार्पियो से कहीं जाते समय एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। उस हादसे में उनका दाहिना पैर कट गया था। 19 यूनिट खून की आवश्यकता पड़ी। उनकी जान बचाने के लिए कई लोग आए और रक्तदान किया। उनकी बदौलत खुर्शेद की जान बची। तभी से उन्होंने अवसर मिलने पर रक्तदान अवश्य करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन के रक्तदान शिविर में उन्होंने दूसरी बार रक्तदान किया।