भंते ज्ञानेश्वर को श्रद्धांजलि देते बौद्ध अनुयाया।स्रोत-सोशल मीडिया
पकवा इनार। कुशीनगर भिक्षु संघ ने सोमवार को भदंत एबी ज्ञानेश्वर की 90वीं जयंती मनाई। इस दौरान म्यांमार बुद्ध विहार में भिक्षुओं और उपासकों ने सूत्र पाठ कर गुरु ज्ञानेश्वर को श्रद्धांजलि दी। सोमवार की सुबह बौद्ध भिक्षुओं ने मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में पांचवीं शताब्दी की लेटी बुद्ध प्रतिमा का दर्शन किया और चीवर चढ़ाया। इसके बाद बोधिवृक्ष के समक्ष धम्म वंदना व जलदान किया। धम्म सभा में मुख्य वक्ता म्यांमार के संघ महानायक धम्म गुरु यानिसरा ने कहा कि भिक्षु ज्ञानेश्वर ने धम्म और लोक कल्याण के कार्य किए। उन्होंने सामाजिक, धार्मिक, शिक्षा सहित अन्य उल्लेखनीय कार्य किए।
जीवन पर्यंत सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। कहा कि बुद्ध के उपदेश करुणा, मैत्री और शांति से ही जीवन में सुख की अनुभूति होगी। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि उनके सामाजिक कार्यों को गति प्रदान कर आगे बढ़ाया जाए। इसके अलावा भिक्षु आनंद, भिक्षु उदय भद्र, भिक्षु सत्या नन्द, भिक्षु राहुल बोधि, भिक्षु दीपांकर, भंते नंदा ने भी भदन्त एबी ज्ञानेश्वर के कृतित्व व व्यक्तित्व को रेखांकित किया। संचालन भिक्षु चंदिमा ने किया। इस मौके पर भिक्षु संघ के मंत्री भिक्षु डॉ. नन्द रतन, भिक्षु महेंद्र, उतराधिकारी भिक्षु नंदका, भिक्षु अशोक, भिक्षु सागरा आदि मौजूद थे।
बुद्ध पीजी कुशीनगर में भिक्षु ज्ञानेश्वर स्मृति द्वार का लोकार्पण
कसया। बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर में सोमवार को म्यांमार के प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान एवं रंगून स्थित धम्मचारिया विश्वविद्यालय के प्रमुख डॉ. न्यानिसारा सितागु सियादो और भारत में म्यांमार के राजदूत उ जा ऊ ने भिक्षु ज्ञानेश्वर स्मृति द्वार का लोकार्पण किया। भंते ज्ञानेश्वर ने इस द्वार के निर्माण कार्य को बड़े मनोयोग से संपन्न कराया था और अपने जन्मदिन के अवसर पर ही इसके लोकार्पण का निर्णय पूर्व में लिया था। इस अवसर पर संबोधित करते हुए भंते न्यानिसारा सितागु ने कहा कि भगवान बुद्ध ने शिक्षा को विश्व कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग बताया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की प्रगति से ही समाज और संसार के कल्याण के द्वार खुलते हैं। भारत में म्यांमार के राजदूत उ जा ऊ ने कहा कि भदंत ज्ञानेश्वर जी का शिक्षा के प्रति गहरा लगाव था और उन्होंने सदैव इसे सेवा का माध्यम माना। अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव सरदार वीरेंद्र सिंह अहलूवालिया ने किया। धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्र ने किया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी, भंते नंदरतन थेरो, भंते महेंद्र, पूर्व प्राचार्य प्रो. अमृतांशु शुक्ल आदि मौजूद रहे।