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Kushinagar News: सावधान! 120 का आम, 10 रुपये जूस का दाम... कुछ तो गड़बड़ है

Mon, 05 May 2025 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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- गर्मी में राहत देने वाला सस्ता आम का जूस असली नहीं, बल्कि मिलाया गया है फ्लेवर और केमिकल का घोल, सेहत के लिए है खतरनाक
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- इसका सेवन सेहत को पहुंचा सकता है गंभीर नुकसान, रंगीन पानी व केमिकल का उपयोग कर तैयार होता है मैंगो शेक

पडरौना। गर्मी की तेज धूप में अगर कोई चीज सबसे ज्यादा राहत देती है तो वह है ठंडा और मीठा जूस। इसमें भी फलों का राजा और सीजन का खबसे उमदा फल आम मिल जाए तो क्या कहने हैं। लेकिन धंधेबाजों ने मुनाफाखोरी के लिए आम के जूस को भी नहीं छोड़ा है। 100 रुपये से भी ज्यादा दाम में मिलने वाले आम का एक गिलास जूस महज सड़क के किनारे और फुटपाथों पर महज 10 रुपये में मिल जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह जूस आम के फलों से तैयार हो रहा है या सिर्फ आर्टिफिशियल फ्लेवर का चमत्कार है? इसकी कोई गारंटी नहीं है। डॉक्टरों की मानें तो मिलावटी आम के जूस का सेवन सीधे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे कई गंभीर बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।
बाजार में सड़क किनारे जूस कार्नरों पर धड़ल्ले से 10 रुपये में आम का शेक बेचा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह आम का नहीं, बल्कि केमिकल और बर्फ मिक्स रस है। इसमें आम की मात्रा नाम मात्र होती है। आम जैसा स्वाद लाने के लिए इसमें एसेंस और कलर के लिए दूध के अलावा अन्य केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसमें बर्फ की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। इस कारण एक गिलास शेक की लागत अधिकतम तीन रुपये होती है। इसे लोगों को 10 रुपये में बेचा जा रहा है। दूषित पेय पीने से डायरिया, फूड प्वाॅइजिंग, आंत में इंफेक्शन, अल्सर, गुर्दे और लीवर पर प्रभाव आदि बीमारियां हो सकती हैं।
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गर्मी में डायरिया के वायरस एवं बैक्टीरिया ज्यादा सक्रिय होने के साथ-साथ आसानी से एक जगह से दूसरे जगह अपनी पहुंच बना लेते हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के बाजारों में आम का भाव 120 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक है। आम तौर पर एक गिलास शुद्ध आम के जूस के लिए 100 ग्राम आम, चीनी, बर्फ और थोड़ा सी पानी की जरूरी होती है। इस हिसाब से एक गिलास आम का जूस निकालने में सिर्फ सामग्री की लागत ही करीब 20 रुपये आती है। ऐसे में 10 रुपये में बिक रहा आम का जूस शक के दायरे में है। जूस विक्रेता रवि मद्धेशिया ने बताया कि हम नींबू का एक गिलास शरबत भी 20 रुपये में बेचते हैं। आम का शुद्ध जूस तो इससे कहीं ज्यादा महंगा पड़ता है। ऐसे में 10 रुपये में आम का जूस केवल फ्लेवर और रंग का खेल है।

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आर्टिफिशियल फ्लेवर व रंग

आम का जूस बनाने वाले जानकार बताते हैं कि बाजार में सस्ते जूस के नाम पर कृत्रिम आम फ्लेवर और रंगों का घोल तैयार किया जा रहा है। उसे बर्फ और मीठे पानी के साथ मिलाकर आम का जूस के नाम से बेचा जा रहा है। यह जूस पीने में स्वादिष्ट तो होता है, लेकिन इसका आम से कोई लेना-देना नहीं होता।

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घर का जूस है ज्यादा फायदेमंद

पुरूष एवं नेत्र चिकित्सालय पडरौना के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संजीव सुमन ने कहा कि वैसे तो बाजार में मिल रही खाने-पीने के सामानों की खरीदारी करते समय शुद्धता को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। बाजार के सस्ते और नकली जूस से बचें और घर पर ताजे फलों से जूस तैयार करें। यह न सिर्फ स्वाद में बेहतर होगा, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुरक्षित और पोषक तत्वों से भरपूर होगा।
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सेहत के लिए हानिकारक

फ्लेवर वाले जूस में शामिल तत्व सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर, प्रिजर्वेटिव और रंग शामिल होते हैं जो पाचन तंत्र, किडनी और हृदय पर बुरा असर डाल सकते हैं। मिलावटी जूस एसिडिटी, गैस और पेट दर्द का कारण बन सकते हैं। इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया जाता है जो किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कुछ जूस में आर्टिफिशियल रंग भी मिलाए जाते हैं। फ्लेवर वाले जूस में अक्सर चीनी की मात्रा अधिक होती है जो वजन बढ़ाने, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे जूस का सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसकी जगह घर पर ताजे फलों से बना जूस पीना अधिक सुरक्षित और फायदेमंद होता है।

- डॉ. प्रवीण कुमार राव, एमडी गैस्ट्रो
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