श्रीलंका बुद्ध विहार परिसर में सम्राट अशोक की जयंती मनाई गई
कसया(कुशीनगर)। कुशीनगर स्थित श्रीलंका बुद्ध विहार परिसर में शनिवार को सम्राट अशोक की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इसमें बौद्ध भिक्षुओं व श्रद्धालुओं ने तथागत बुद्ध व विहार में बने अशोक स्तंभ का पूजन किया। इस दौरान प्रियदर्शी सम्राट अशोक महान की लोकनीति विषय पर चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि भिक्षु ज्ञानेश्वर ने सम्राट अशोक को महान शासक बताया। कहा कि राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने और कुशल शासन प्रणाली के चलते उनके राज्य में जनता सुखी थी। कलिंग युद्ध के बाद मनोवृत्ति में बदलाव और बौद्ध धर्म धारण कर लेने के बाद भगवान बुद्ध के सिद्धांत शांति, अहिंसा और सत्य को विश्व के देशों में पहुंचाया।
मुख्य वक्ता डॉ. निगम मौर्य ने कहा कि किसी समाज व राष्ट्र की समृद्ध उसे प्रेरित भी करती है और बेहतर कर दिखाने की चुनौती भी देती है। यह राष्ट्र ही नहीं संपूर्ण विश्व चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य का ऋणी है, जिन्होंने संसार को धम्म विजय जैसा विचार दिया। भारत के इतिहास में एक से बढ़कर एक प्रतापी राजा हुए हैं, लेकिन चक्रवर्ती सम्राट अशोक उन सब में ध्रुव तारे की तरह अलग चमक व स्थान रखते हैं। देश के सबसे बड़े भूभाग पर शासन करने के बावजूद अपनी प्रजा के कल्याण के लिए सड़क, अस्पताल, सराय, पोखरे व नहर खुदवाए।
इसके पहले भिक्षुओं व श्रद्धालुओं ने धम्म पाठ के बीच बुद्ध व अशोक स्तूप का पूजन, वंदन किया। अध्यक्षता नथुनी कुशवाहा व आभार डॉ. भिक्षु नंद रतन थेरो ने व्यक्त किया। इस मौके भंते अशोक, भंते विनय कीर्ति, भंते सागर, भंते मुलायम, रामेश्वर कुशवाहा, दिनेश चौधरी, जय सिंह सैंथवार, लल्लन मौर्य देवरिया, शारदा प्रसाद, उमा कुशवाहा, राजकुमारी सिंह, सत्यनारायण कुशवाहा, राजाराम कुशवाहा, ब्रजेश कुशवाहा, कमलेश कुशवाहा, प्रभुनाथ सिंह, ओमप्रकाश कुशवाहा, आमोद सिंह, राधेश्याम सिंह आदि मौजूद रहे।