कुशीनगर। गोरखपुर के पिपराइच में हुए युवक की हत्या में शामिल पशु तस्करों में पश्चिमी यूपी के तस्कर जुबैर को पुलिस ने मुठभेड़ में पिछले दिन मार गिराया। इसके अलावा गोपालगंज के एक तस्कर की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
कुशीनगर के पटहेरवा के एक तस्कर को पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार किया। इसके बाद पूछताछ और इनकी निशानदेही पर कुशीनगर से लेकर गोपालगंज और सिवान तक यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और जिले की एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ) दबिश देने के साथ तस्करों के धरपकड़ का प्रयास कर रही है लेकिन बिहार में वहां की पुलिस द्वारा विशेष सहयोग न मिल पाने से पशु तस्करों तक पहुंचने से पहले वह अपना ठिकाना बदल दे रहे हैं या उनकी कोई सूचना ही पुलिस को नहीं मिल रही है। इससे पुलिस द्वारा मुख्य तस्करों और उनके संगठित गिरोह पर कार्रवाई कर जड़ से खत्म करने की तैयारी पर पानी फिर रहा है।
कुख्यात पशु तस्करों पर प्रहार के लिए तत्पर यूपी एसटीएफ और एसओजी को बिहार पुलिस का साथ नहीं मिलने से तस्करों का गिरोह तोड़ अभियान कमजोर पड़ रहा है। गोपालगंज में मन्नू शाह के ठिकाने और उससे जुड़े तस्करों के धरपकड़ के लिए दबिश और सिवान में मन्नू शाह के रिश्तेदार और रामपुर के जुबैर के करीबी मन्नू शाह के दामाद को ढूंढने के लिए कुशीनगर पुलिस पहुंच रही है और दबिश देने की कोशिश कर रही है लेकिन बिहार पुलिस का साथ नहीं मिल पाने के कारण पुलिसिया अभियान फीका पड़ रहा है। सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि गोपालगंज और सिवान में दुर्गा पूजा को लेकर लग रहे बड़े बड़े पंडाल और मेले के कारण भी पुलिस साथ नहीं दे पा रही है।
इसके अलावा गोपालगंज और सिवान में चुनाव के कारण लगातार हो रही राजनीतिक जनसभाओं के कारण लगातार बड़ी राजनीतिक हस्तियां यहां तक पहुंचती हैं जिसके कारण कई थानों की पुलिस और स्पेशल गठित टीम का ड्यूटी लगने के कारण पुलिस साथ नहीं दे पा रही है।
पूरब से पश्चिम तक के पशु तस्करों का 500 से अधिक मोबाइल नंबर पुलिस के हाथ लगा है, इसकी मदद से पुलिस उन तक पहुंचने की जुगत में जुटी है, लेकिन पुलिस की सख्त तेवर को देखते हुए पशु तस्कर भूमिगत हो गए हैं। गोपालगंज के पशु तस्करों का कुशीनगर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में रिश्तेदारी और करीबी हैं, पुलिस इसको भी ट्रेस करने में जुटी है, क्योंकि पश्चिमी चंपारण के धनहा में पुलिस पर हमला करने के बाद पशु तस्करों के करीबी पडरौना शहर में आकर छिपे थे, जिसकोे पडरौना पुलिस की मदद से पश्चिमी चंपारण की पुलिस हिरासत में लेकर गई थी।