पशु अस्पताल ही बीमार, कैसे होगा पशुओं का इलाज
जनपद के 18 पशु अस्पताल डॉक्टर विहीन
सिर्फ छह डॉक्टरों के भरोसे है 24 अस्पताल
कुशीनगर। जनपद में पशुओं के उपचार का समुचित इंतजाम नहीं है। इनका उपचार करने के लिए बने पशु अस्पतालों में 18 चिकित्सक विहीन हैं। सिर्फ छह डॉक्टरों के भरोसे जिले के पशुधन के उपचार और टीकाकरण कराने की जिम्मेदारी है। पशुपालन विभाग में अन्य पद भी काफी संख्या में रिक्त हैं।
पशुपालन विभाग की मानें तो जनपद में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का एक, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के पांच, पशु चिकित्साधिकारी के 22, पशुधन प्रसार अधिकारी के 30, वेटनरी फार्मासिस्ट के 24, सहायक लेखाकार का एक, वरिष्ठ सहायक का एक, कनिष्ठ सहायक के दो, अन्वेषक कम संगणक का एक, उर्दू अनुवादक और ड्रेसर का एक-एक पद स्वीकृत है। इनके अलावा अनुचर के 56 और स्वीपर के दस पद स्वीकृत हैं। इस तरह पशुपालन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के कुल 155 पद स्वीकृत हैं।
इसके सापेक्ष मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का पद रिक्त है। इनकी जगह उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को प्रभार मिला है। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एक ही कार्यरत हैं। छह पशु चिकित्सक, 18 पशुधन प्रसार अधिकारी, छह वेटनरी फार्मासिस्ट, एक सहायक लेखाकार कार्यरत हैं। वरिष्ठ सहायक का पद रिक्त है। दो कनिष्ठ सहायक, एक उर्दू अनुवादक, 23 अनुचर और छह स्वीपर तैनात हैं। जबकि ड्रेसर का पद खाली है। जिले भर में कुल 65 अधिकारी-कर्मचारी ही पशुपालन विभाग में कार्यरत हैं। इनकी कम संख्या की वजह से पशुओं के उपचार से लगायत टीकाकरण और योजनाओं के सही ढंग से क्रियान्वयन में कठिनाई होती है।
पशुपालन विभाग की विभिन्न इकाइयां
जिले में स्थापित पशु चिकित्सालयों की संख्या 24 है। डी श्रेणी चिकित्सालय एक है। पशु सेवा केंद्र 28 हैं। बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र एक और ग्राम समूह इकाई छह है।
कोट
पशुपालन विभाग में स्वीकृत पदों के सापेक्ष अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है। एक-एक पशु चिकित्सक के जिम्मे तीन-तीन अस्पतालों की जिम्मेदारी है। अन्य कर्मचारियों की संख्या भी कम है। पशुपालकों को कोई परेशानी न हो, इसलिए रिक्त पदों को भरने की खातिर शासन को पत्र भेजा गया है।
डॉ. विकास साठे, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
भवन हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं
पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में बेजुबानों के इलाज के लिए भवन तो हैं, लेकिन पशु चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं।
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में लगभग 24 हजार पशु हैं। उनके उपचार के लिए कोटवा स्थित ब्लॉक मुख्यालय के सामने पशु अस्पताल बना है। पिछले वर्ष भवन का जीर्णोद्धार हुआ है। वर्तमान में अस्पताल में पशु चिकित्सक की तैनाती नहीं है, सिर्फ फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल है। इस केंद्र पर सात पशुमित्र कार्यरत हैं। उनकी जिम्मेदारी गांव में पशुओं का टीकाकरण करने की है। क्षेत्र में दो उपकेंद्र मड़ार बिंदवलिया और देवगांव में बने हैं, जहां पशुधन प्रसार अधिकारी तैनात हैं, लेकिन मौजूदा समय में उन्हें गो संवर्धन केंद्र कोपजंगल से संबद्ध कर दिया गया है। समय से टीकाकरण और इलाज न होने के कारण पशु खुरपका, मुंहपका, सर्रा रोग, गलाघोंटू, रेंटरपेस्ट जैसे रोगों की चपेट में आकर दम तोड़ रहे हैं। पारसनाथ, शारदा, सुरेश, अजय, हरि कुशवाहा, कौशल, राधेश्याम का कहना है कि पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के लिए निजी चिकित्सक के पास पड़ता है। संवाद
अनुचर के भरोसे है पशु अस्पताल
टेकुआटार। पशु चिकित्सालय टेकुआटार एक अनुचर के भरोसे चल रहा है। एक डॉक्टर की तैनाती भी है तो सप्ताह में एक दिन शनिवार को केवल आते हैं।
अस्पताल में अनुचर डेबा यादव मिले। उनके भरोसे ही यह अस्पताल संचालित हो रहा है। यहां के प्रभारी पशु चिकित्सक डॉ. एसके सिंह ने बताया कि रामकोला, कसया का भी प्रभार उनके पास है। इस वजह से नियमित आना संभव नहीं होता। शनिवार को टेकुआटार बैठते हैं। टीकाकरण और एचएस की वैक्सीन आने वाली है। उसके मिलते ही क्षेत्र के पशुओं का टीकाकरण करा दिया जाएगा। संवाद
फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा अस्पताल
तमकुहीराज। तमकुहीराज का पशु चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित है। यहां का चार्ज लेने वाले पशु चिकित्सक के पास अन्य अस्पतालों का चार्ज है। ऐसे में वह कभी-कभार ही आ पाते हैं। अस्पताल में बना पशुओं का शेड जर्जर हो चुका है।
यहां के पशु चिकित्सक का चार्ज डॉ. एके सिंह के पास है। उनके पास फाजिलनगर एवं तुर्कपट्टी अस्पताल का भी चार्ज है। अन्य स्टॉफ के नाम पर एक फार्मासिस्ट, एक चपरासी, एक चौकीदार एवं एक स्वीपर की तैनाती है।स्टॉकमैन का पद रिक्त है। प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह का कहना है कि सर्रा बीमारी के लिए कोई टीका नहीं बना है। यह बीमारी एक प्रकार की मक्खी के काटने से फैलता है। बीमार पशु के संपर्क में आने से अन्य पशु भी ग्रसित हो जाते हैं। बकरियों में होने वाले पीपीआर बीमारी के लिए क्षेत्र में टीकाकरण कराया गया है। संवाद