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इंस्टॉल नहीं हो पाईं डायलिसिस मशीनें, आखिर कैसे मिलेगी मरीजों को राहत

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जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में बालिका का इलाज करते डॉ. राजेश कुमार। - फोटो : KUSHINAGAR
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इंस्टॉल नहीं हो पाईं डायलिसिस मशीनें, आखिर कैसे मिलेगी मरीजों को राहत
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प्रतिदिन 30 मरीजों की होती है डायलिसिस, फिर भी तीन महीने की चल रही वेटिंग
कुशीनगर। किडनी के मरीजों की संख्या जिले में बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए पांच नई डायलिसिस मशीनें तीन माह पहले जिला अस्पताल में मंगाई गई थीं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण इन्हें इंस्टॉल नहीं किया जा सका है। इससे ये मशीनें उपयोग में नहीं हैं। लिहाजा तीन महीने से मरीज डायलिसिस के लिए नंबर लगाए बैठे हैं।
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना जनवरी 2018 में हुई थी। तत्कालीन डीएम डॉ. अनिल कुमार सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। यह यूनिट लगने के बाद चार हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। शुरुआत में यहां पांच मशीनें उपलब्ध हुईं। बाद में मरीजों की संख्या बढ़ी तो इसे बढ़ाकर दस कर दी गईं। इसमें एक मशीन हेपेटाइटिस के मरीजों के लिए है। जबकि नौ मशीनों से किडनी रोगियों की डायलिसिस होती है। प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। इसके बावजूद मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। मरीजों के कई दिनों तक प्रतीक्षा सूची में होने की वजह से जिला अस्पताल प्रशासन की तरफ से पांच और मशीनों की मांग की गई थी। पांच नई मशीनें तीन महीने पहले मिल भी गईं, लेकिन इंस्टॉल तक नहीं की जा सकी हैं।
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एनएचएम से मिली हैं मशीनें
जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि पांचों मशीनें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से मिली हैं। इन्हें आए तीन महीने हो गया, लेकिन इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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90 मरीज हैं प्रतीक्षा सूची में
जिला अस्पताल में स्थापित डायलिसिस यूनिट के प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मशीनों के इंस्टॉलेशन के लिए एनएचएम लखनऊ की इजाजत मिलनी जरूरी है। तभी इंजीनियर आकर इसे इंस्टॉल करते हैं। बुधवार को ही रिमाइंडर भेजा गया है। जनपद में किडनी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होने के बावजूद करीब 90 मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं।
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क्यों जरूरी है डायलिसिस
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिन लोगों की किडनी काम नहीं करती है और किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करा सकते, उनके बचाव के लिए डायलिसिस ही उपाय है। इसके जरिए कृत्रिम रूप से किडनी की सफाई होती है। मरीज की आवश्यकता के अनुसार एक, दो या इससे अधिक बार प्रति सप्ताह डायलिसिस करनी पड़ती है। निजी डायलिसिस सेंटर में प्रति डायलिसिस के तीन से चार हजार रुपये लगते हैं। जबकि जिला अस्पताल में यह निशुल्क है।
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कोट
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक को कई पत्र भेजकर अनुरोध कर चुके हैं कि इन मशीनों को इंस्टॉल कराकर चालू करा दिया जाए। अब तक मशीनें जस की तस पड़ी हैं।
डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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