पडरौना। लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आगलगी की घटना के बाद डीएम के आदेश पर जिम्मेदार सक्रिय हुए और सुरक्षा के मानकों की जांच की, लेकिन कुछ कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी संचालकों को नोटिस देने तक कार्रवाई सिमट गई। अब भी बेसमेंट में कई प्रतिष्ठान व अस्पताल बेखौफ तरीके से संचालित हो रहे हैं। प्रशासन की सख्ती का इन पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
लखनऊ कोचिंग सेंटर में भीषण अग्निकांड में 15 की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसमेंट व मानक विहीन संचालित कोचिंग सेंटरों सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच कर कमी पाए जाने पर कार्रवाई के लिए सख्त निर्देश दिया था। डीएम महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर जिले के छह तहसीलों में एसडीएम की अगुवाई में कोचिंग सेंटरों की जांच कराई गई, लेकिन अब तक कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे कोचिंग के धंधेबाजों पर अंकुश लगे सके। यह पूरा अभियान कार्रवाई की जगह जांच व रिपोर्ट सौंपने तक ही सिमट गया है।
शहर के छावनी, सुभाष चौक से बड़ी नहर पुल के बीच, रामकोला रोड, तिलक चौक समेत कई स्थानों पर बेसमेंट में प्रतिष्ठानों का संचालन किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि अग्निशमन विभाग के पास कोचिंग सेंटरों को एनओसी का कोई आंकड़ा नहीं है। घटना के बाद अग्निशमन विभाग की ओर से डीआईओएस को पत्र लिखकर रजिस्टर्ड कोचिंग सेंटरों की जानकारी मांगी है। यही हाल सीएमओ कार्यालय का है। सुरक्षा के मानक पर सवाल खड़ा होने के बाद एक विभाग के जिम्मेदार दूसरे विभाग के जिम्मेदारों के सिर ठिकरा फोड़ रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर खानापूरी की जा रही है। संवाद