तुर्कपट्टी। मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। शास्त्रों में कहा गया है कि 84 लाख योनियों के बाद यह अमूल्य मानव शरीर प्राप्त होता है। यह केवल खाने-पीने, सोने और भौतिक सुखों एवं सुविधाओं में लिप्त रहने के लिए नहीं है, बल्कि ईश्वर की भक्ति और आत्मा के उत्थान के लिए मिला है। भौतिक जीवन से आध्यात्म का मार्ग कभी प्रशस्त नहीं हो सकता।
ये बातें कथा वाचक मंदाकिनी ने कही। वे रविवार को महुआ कारखाना के पुरंदरपुर टोल स्थित मंदिर परिसर में चल रहे रुद्रमहाज्ञ में कथा सुना रहीं थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोग धन, पद, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहे हैं। भोग-विलास क्षणिक सुख देते हैं, लेकिन अंत में दुख और अशांति ही प्रदान करते हैं। भगवान का भजन, सत्संग, दान, त्याग, परसेवा और सच्चे कर्म ही मनुष्य को सच्ची शांति और मोक्ष की ओर ले जा सकते हैं। कहा कि भगवत भजन के बिना जीवन अधूरा है। इस कलयुग भक्ति ही आपकी शक्ति है।
इस दौरान अशोक सिंह, उमेश सिंह, ध्रुवनारायण सिंह, दिनेश सिंह, प्रभुनाथ मिश्र, जितेंद्र यादव, पवन सिंह, बेचू सिंह, प्रवीण सिंह, रमाशंकर सिंह आदि मौजूद रहे।