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उधार की व्यवस्था से बन रहा मिड-डे मील

Mon, 18 Nov 2013 05:41 AM IST
Kushinagar
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पडरौना। जनपद के कई परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन उधार के राशन और सामान से बन रहा है। नये शिक्षण सत्र की शुरुआत से ही अबतक इस मद का बजट विद्यालयों को प्राप्त नहीं हो सका है। यही कारण है कि इस की व्यवस्था में लगे लोग अब तक उधार के भरोसे इस गाड़ी को खींच रहे हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दोपहर का भोजन मुहैया कराने के लिए मध्याह्न भोजन योजना की व्यवस्था इसके लिए मिलने वाले बजट के बाद ग्राम प्रधान और प्रधानाचार्य के माध्यम से की जाती है। इसके लिए गेहूं और चावल की व्यवस्था शासन के कोटे की दुकानों के माध्यम से की है और इसको बनाने में लगने वाली अन्य सामग्रियों का खर्च विद्यालय के खाते में आता है। पांच माह का समय बीत जाने के बाद भी अब तक भोजन बनाने में लगने वाले खर्च के बजट विद्यालयों को नहीं मिल सके हैं। यह हाल केवल कुछ विद्यालयों का नहीं बल्कि पूरे जनपद का है। इसके बाद भी आला अधिकरियों का ध्यान इस ओर न जाना, कई सवाल खड़े कर रहा है। दुकानदारों से उधार के सहारे समान लेकर चल रही यह व्यवस्था अब लड़खड़ाने लगी है। खड्डा, नेबुआ नौरंगिया, विशुनपुरा, रामकोला और सुकरौली आदि ब्लॉकों के कुछ स्कूलों में तो चूल्हे बुझ चुके हैं। हाटा प्रतिनिधि के अनुसार हाटा ब्लॉक के कुछ विद्यालयों में कन्वर्जन कास्ट के अभाव में या तो मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा है, या मेन्यू को दरकिनार कर बच्चों को सिर्फ खिचड़ी खिलाई जा रही है। एक शिक्षक ने कहा कि एक माह में बकाया चुकता करने के नाम पर सामान लिए गए थे। अब पांच माह हो चुका है। धन नहीं आने से एमडीएम कैसे बनवाया जाए, समझ में नहीं आता। कई विद्यालयों में एमडीएम बनना बंद हो चुका है या बंद होने की कगार पर है।
इस बारे में बीएसए प्रदीप कुमार पांडेय का कहना है कि इस बार एमडीएम के लिए धन आने में देर हुई है। काफी लिखा-पढ़ी के बाद इधर कुछ धन आया है। हालांकि, वह पर्याप्त नहीं है। जो धन आया, उसे शीघ्र विद्यालयों में मुहैया कराया जाएगा। ताकि बच्चों को भोजन मिल सके। वैसे जानकारी मिली है कि और धन आने वाला है।
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