पडरौना (कुशीनगर)। अब पूरी तरह से तय हो गया है कि कुशीनगर में ही मैत्रेय परियोजना रहेगी। शुक्रवार को लखनऊ में हुई दो राउंड की उच्चस्तरीय बैठक से लौटने के बाद डीएम रिग्जियान सैंफिल प्रशासनिक अमले के साथ शनिवार को पूरे दिन मैत्रेय की जमीन को लेकर जुटे रहे। प्रथम फेज के लिए अधिग्रहित 273 एकड़ भूमि में से किसानों की 256 एकड़ भूमि का मुआवजा देने की तैयारियां जोरों पर चलती रहीं।
वर्ष 2003 में मैत्रेय परियोजना के लिए करीब 700 एकड़ जमीन की मांग हुई थी और बाद में जमीन अधिग्रहीत भी कर ली गई। कागज में भी यह जमीन अब शासन के पक्ष में है। इसी बीच विरोध होने के बाद इसके आकार को कम कर 273 एकड़ कर दिया गया, जिसमें से 17 एकड़ जमीन शासन की ही है। शनिवार को डीएम, एसडीएम कसया, एसएलओ व परियोजना से जुड़े अफसर डीएम के कैंप कार्यालय पर बैठे। बैठक में किसानवार प्रभावित हो रही भूमि और एयरपोर्ट की दर पर 945 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिए जाने का आंगणन तैयार किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसके लिए राजस्व कर्मियों को भी बुलाया गया था। इसी के साथ बांड बनवाने की तैयारी की गई, जिस पर 27 नवंबर की बैठक में किसानों को राजी कर हस्ताक्षर कराया जाना है। जानकारी के अनुसार 27 को किसानों की बैठक के तत्काल बाद एक विशेष वाहक से भुगतान की पत्रावली कमिश्नर को स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी और तय बातचीत के अनुसार उसी दिन शाम को कमिश्नर अपनी स्वीकृति देकर फाइल कुशीनगर को लौटा देंगे। प्रशासन ने मुआवजा वितरित करने की समयसीमा भी निर्धारित कर दी है और पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए दस दिसंबर तक सभी प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की योजना बनाई है।