पडरौना (कुशीनगर)। कुशीनगर जनपद में सस्ते गल्ले की 107 दुकानें महीनों से निरस्त चल रही हैं। इन दुकानाें के लिए कोटेदार चयन में हुई देरी के चलते 65 दुकानदारों ने विभिन्न न्यायालयों से स्टे ले लिया है। शेष 42 दुकानों पर भी चयन की प्रक्रिया अधर में लटकी है। इसके चलते इन दुकानों के क्षेत्र में आने वाले लोगों को राशन के लिए दूसरे गांव जाना पड़ रहा है।
कुशीनगर जनपद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कुल 1386 दुकानें हैं। इन दुकानों से 117136 अंत्योदय कार्डधारक, 190142 बीपीएल कार्डधारक और 404510 एपीएल कार्डधारकों को राशन, चीनी और मिट्टी के तेल का वितरण होता है। इनमें से 107 दुकानें अनियमितता या ऐसे ही अन्य कारणों के चलते निलंबित होने के बाद निरस्त हो चुकी हैं। निलंबित होते ही इन दुकानों को बगल के गांवों में स्थित सस्ते गल्ले की दुकानों से अटैच कर दिया गया था। सस्ते गल्ले की कोई भी दुकान नियमानुसार तीन महीने से ज्यादा दिन तक अटैच कर नहीं चलाई जा सकती, लेकिन इन दुकानों को निरस्त हुए छह-छह महीने तक बीत चुके हैं। बावजूद इसके इन दुकानों के लिए नए कोटेदाराें का चयन नहीं हो पाया। इसके चलते इन गांवों के लोगों को राशन के लिए दूसरे गांवों में अटैच दुकानदारों के यहां चक्कर लगाना पड़ता है। कोटेदार चयन में देरी का लाभ उठाते हुए निरस्त 107 दुकानों में से अब तक 65 कोटेदार स्टे ले चुके हैं। अब जिन 42 दुकानों के लिए नए कोटेदार का चयन होना है, उनमें छह विकलांग, पांच दृष्टिबाधित और 25 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार नए दुकानदार को चयनित करने के लिए ग्राम सभा की खुली बैठक होनी हैं, जिसमें सर्वसम्मति अथवा सर्वाधिक पसंद के आधार पर कोटेदार का चयन होता है। ग्राम सभा के उस प्रस्ताव के आधार पर ही नए कोटेदार का अनुबंध पत्र तैयार होगा। परंतु ग्राम सभाओं में अभी तक बैठक ही नहीं हुई। नौ नवंबर को फिर डीएम कार्यालय से जनपद के सभी संबंधित बीडीओ को नया दुकानदार चयनित करने के लिए ग्राम सभा की बैठक कराने का निर्देश दिया गया है, बावजूद इसके कहीं कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि बार-बार पत्र भेजा जा रहा है। कोटेदारों का चयन ग्राम सभा की खुली बैठक में ही होना है, परंतु अभी तक नहीं हो पाया है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियाें को भी दे दी गई है।