सांथा। विकास खंड सांथा के धोबहा ग्राम पंचायत में बंदरों को पकड़ने के नाम पर 60 हजार रुपये की अनियमितता का मामला सामने आया है। गांव से करीब सौ बंदरों को पकड़ने के लिए एक फर्म को इस राशि का भुगतान किया गया है, जबकि नियमत: यह काम किसी फर्म को दिया ही नहीं जा सकता। प्रधान का कहना है कि उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं। ग्रामीणों का तो यह भी कहना है कि जितने बंदरों को पकड़ने के लिए रकम का भुगतना किया गया है , उतने पकड़े ही नहीं गए। मामला सामने आने के बाद डीपीआरओ ने इसकी जांच कराने की बात कही है।
जानकारी के अनुसार, गांव के एक व्यक्ति ने कुछ महीने पहले गांव में बंदरों को पकड़ने के नाम पर अनियमितता की शिकायत अधिकारियों से की थी। उसमें बताया गया कि 19 जून को धोबहा ग्राम पंचायत में बंदरों को पकड़ने के लिए गणेशा ट्रेडर्स एंड सप्लायर फर्म को 60 हजार रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि बंदर पकड़ने के लिए किसी फर्म को जिम्मेदारी दी ही नहीं जा सकती, बल्कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर मजदूरों से काम कराया जाता है और सीधे उनके खाते में ही भुगतान होता है। यही नहीं जितने बंदर पकड़ने की बात कही जा रही है उतने पकड़े भी नहीं गए।
गांव के लोगों का कहना है कि मई- जून महीने में बंदर पकड़ने के लिए कुछ लोग आए थे लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो 10-12 बंदरों को पकड़कर टीम चली गई। इस संबंध में फर्म के संचालक तुलसीराम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमने कोई गड़बड़ी नहीं की है। सारे काम नियमानुसार किए हैं। वहीं ग्राम प्रधान भोला का कहना है कि इसके बारे में पंचायत सचिव ही बता सकते हैं। इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वहीं ग्राम पंचायत सचिव करनजीत का फोन बंद मिला।