कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ दीपोत्स्व का आरंभ होता है। इस बार त्रयोदशी तिथि दो दिन होने के कारण धनतेरस की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मगर, 18 अक्तूबर को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा।
हुबलाल संस्कृत महाविद्याल के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि पंचांग के मुताबिक, दिवाली उत्सव की शुरुआत 18 अक्तूबर को धनतेरस के साथ हो रही है। 19 को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली और 20 अक्तूबर को दिवाली मनाई जाएगी। तिथि व नक्षत्रों के संयोग के कारण इस बार भी पांच दिवसीय दिवाली पर्व छह दिन मनाया जाएगा।
यह 18 अक्तूबर को धनतेरस से प्रारंभ होकर 23 अक्तूबर को भैया दूज के दिन खत्म होगा। अमावस्या तिथि 20 अक्तूबर को दोपहर 3:45 बजे से आरंभ होकर 21 अक्तूबर को शाम 5:54 बजे तक रहेगा। सूर्यास्त शाम 5.40 बजे होगा अर्थात 21 अक्तूबर को मात्र 14 मिनट ही प्रदोष में अमावस्या प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इस बार तिथि, नक्षत्र, समय, सूर्यास्त व चंद्रास्त के परिप्रेक्ष्य से देखें तो धर्मग्रंथों के अनुसार 20 अक्तूबर को ही कर्मकाल तिथि में पूर्ण अमावस्या प्राप्त है, इसलिए 20 अक्तूबर को ही दिवाली मनाना सही है।
दीपावली पर्व के श्रेष्ठ पूजन मुहूर्त
धन्वंतरि पूजन: 18 अक्तूबर, सायं 5:46 से 7:21 बजे तक
धनतेरस खरीदारी: 18 अक्तूबर, दोपहर 12:19 से 4:20 बजे तक, रात्रि 8:55 से 1:38 बजे तक
- 19 अक्तूबर, प्रातः 7:47 से दोपहर 12:26 बजे तक
दीपावली पूजन (20 अक्तूबर)
- प्रतिष्ठान मुहूर्त, सायं 5:44 से 7:19 बजे तक
- गृह पूजन, शाम 7:05 से रात 9:01 बजे तक (वृषभ लग्न)
- निशीथ काल पूजन, रात 1:36 से 3:53 तक (सिंह लग्न)
गोवर्धन पूजा: 22 अक्तूबर, सुबह 6:23 से 9:13, शाम 6:59 से 8:55 बजे तक
भाई दूज: 23 अक्तूबर, सुबह 10:38 से दोपहर 1:27 बजे तक