चबूतरों पर खुले में रखे ट्रांसफार्मर हादसे को दे रहे दावत
- बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार का दावा करने वाले अफसर नहीं दे रहे ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
नेवादा। गांवों में आबादी के बीच चबूतरों पर खुले में रखे ट्रांसफार्मर हादसों को दावत दे रहे हैं। इसे लेकर ग्रामीण खासा चिंतित हैं, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।
विद्युत उपकेंद्र पुरखास के तिल्हापुर व हसनपुर समेत कई अन्य गांवों में बिजली आपूर्ति के लिए बस्ती में ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। ट्रांसफार्मरों को केवल चबूतरा बनाकर खुले में रख दिया गया है, जबकि नियमों के अनुरूप इसके चारों ओर सुरक्षा के लिए जाली लगाई जानी चाहिए। तिल्हापुर गांव भुल्लू, बुधान, अमृतलाल, समई, शिवशंकर पांडेय, लालमन आदि ने बताया कि आबादी के बीच ट्रांसफार्मर लगा है। इसके तारों में अक्सर स्पार्किंग होती रहती है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। हसनपुर के सतीश, बलवंत सिंह, झल्लर ने बताया कि खुले में रखे ट्रांसफार्मर के आसपास गुजरने से भी भय लगता है। सबसे ज्यादा हादसे की आशंका तो मवेशियों को रहती है। जहां ट्रांसफार्मर लगा है वहीं बगल में तालाब है। प्रतिदिन सैकड़ों मवेशी पानी पीने व नहाने जाते हैं। इससे उनके करंट की चपेट में आने की संभावना ज्यादा रहती है।
बरसात के मौसम में रहता अधिक खतरा
बारिश का मौसम आने वाला है। इससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि चबूतरों के आसपास बरसात के मौसम में जमीन पर नमी रहती है, जिससे ट्रांसफार्मरों के पास से गुजरना खतरे से खाली नहीं है। जमीन गीली होने के कारण करंट जमीन में भी दौड़ जाता है, जिससे करंट लगने की अधिक संभावनाएं होती हैं।
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जिन गांवों में खुले में ट्रांसफार्मर रखे हैं उनका सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद एस्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए विभाग को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही जालियों की बैरीकेडिंग लगाकर सुरक्षित किया जाएगा।
सौरभ मौर्य, जेई पुरखास
हसनपुर गांव की बस्ती में चबूतरे पर रखा ट्रांसफार्मर