The search for Saraswati river continued for the third day
- फोटो : KAUSHAMBI
विलुप्त नदी सरस्वती की खोज के लिए क्षेत्र के इछना गांव में काम कर रही एनजीआरआई (राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान) के वैज्ञानिकों की टीम तीसरे दिन भी डटी रही। टीम ड्रिंलिंग के जरिए रेत के नमूने लेकर नदी की जलधारा और उसकी उम्र के बारे में पता लगाने में जुटी है।
तीसरे दिन टीम ने मात्र बीस मीटर तक ही ड्रिलिंग करके रेत के नमूने एकत्र किए। बुधवार को टीम 20 मीटर से नीचे ड्रिलिंग करके सैंपल जुटाएगी।
टीम की अगुवाई कर रहे एनजीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. इमरान खान ने बताया कि हवाई सर्वे (हैलिबोर्न) के जरिए नेवादा के इछना गांव के आसपास विलुप्त सरस्वती नदी की जलधारा होने के कुछ प्रमाण मिले हैं।
इन्हीं प्रमाणों के आधार पर तेलंगाना के हैदराबाद स्थित एनजीआरआई के वैज्ञानिकों की एक टीम लगातार अध्ययन कर रही है। इसके लिए टीम ने पिछले तीन दिनों से गांव में डेरा डाल रखा है। पहले और दूसरे दिन तक टीम ने ड्रिलिंग करके मात्र 15 मीटर तक के बालू का नमूना एकत्र किया गया।
संग्रहित बालू के नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया। इस दौरान टीम को कोई ठोस सुबूत नहीं मिले। तीसरे दिन टीम ने 20 मीटर तक ड्रिलिंग कर नमूने एकत्र किए। भूतत्व वैज्ञानिक डॉ. इमरान ने बताया कि एक सप्ताह तक ड्रिलिंग करके रेत और पानी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। अगले एक सप्ताह तक टीम ड्रिलिंग करेगी।