ब्लॉक प्रमुख नेवादा का चुनाव इस बार प्रशासन के लिए चुनौती भरा रहा। कभी सपा तो कभी भाजपा के कब्जे में रहने वाली सीट पर इस बार का मुकाबला भाजपा बनाम भाजपा ही रहा। सांसद और स्थानीय विधायक का नाम लेकर मैदान में उतरे दोनों उम्मीदवारों में वर्चस्व की लड़ाई रही। वर्चस्व की इस जंग में प्रशासन को भी परेशान होना पड़ा। कोई अनहोनी नहीं होने पाए इसके लिए सुबह से ही एसडीएम, सीओ सहित तमाम अफसर मौके पर मौजूद रहकर पल-पल की निगहबानी करते रहे।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नेवादा ब्लॉक प्रमुख की सीट पर इस बार सपा और बसपा ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे। भारतीय जनता पार्टी से ताल्लुक रखने वाले इलाके के दो उम्मीदवार ब्लॉक प्रमुख के लिए मैदान में उतारे। इसमें धर्मेंद्र पांडेय गुट से प्रदीप कुमार प्रत्याशी, जबकि संदीप मिश्रा गुट से खिजिरपुर कैलई उर्फ इमलीगांव की महिला क्षेत्र पंचायत सदस्य केलपति रहीं। वर्चस्व को लेकर चल रही चुनावी जंग को देखते हुए प्रशासन ने सुबह से ही नेवादा ब्लॉक को छावनी में तब्दील कर दिया।
सांसद और चायल विधायक का नाम लेकर मैदान में उतरे दोनों उम्मीदवारों की तरफ से जमकर मुकाबला हुआ। मतगणना में दोनों उम्मीदवारों को 47-47 मत मिलने से मुकाबला टाई हो गया। इससे स्थानीय अफसर एक बार फिर से मुसीबत में फंस गए। मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने टॉस कराकर मुकाबले का फाइनल रिजल्ट निकाला। इसमें संदीप मिश्रा गुट की केलपति को विजय हासिल हुई।
चायल में निर्विरोध चुने गए दिलीप प्रजापति, अफसरों ने भी सराहा
सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित ब्लॉक प्रमुख की सीट पर निर्विरोध चुने गए दिलीप प्रजापति शनिवार को जब जीत का प्रमाण पत्र लेने कलक्ट्रेट पहुंचे तो अफसरों ने इनकी सराहना की। दिलीप ने गले में सोने की कई मालाएं पहन रखीं थी। इको देखते हुए जिलाधिकारी ने इन्हें गोल्डन बाबा का नाम दे दिया।
इस पर वहां पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े। इस दौरान डीएम और एसपी राधेश्याम ने जीते हुए सभी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी प्रत्याशी चुनावी जुलूस से बचे और घर पहुंचकर ही खुशी का इजहार करें।