मानसून की पहली झमाझम बरसात ने जिला मुख्यालय में सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी। मुख्यालय के ज्यादातर दफ्तर पानी में डूब गए। हालात यह रहे कि सरकारी आवास में रहने वाले लोग मंगलवार सुबह नित्य क्रिया के लिए परेशान रहे।
घर से लेकर शौचालय तक में पानी भरा रहा। लोगों का फोन नगर पालिका प्रशासन के पास घनघनाता रहा, लेकिन किसी ने जलनिकासी की व्यवस्था कराने की जहमत नहीं उठाई।
जिले में मंगलवार शाम से जोरदार बरसात हुई। इसकी वजह से मंझनपुर स्थित ज्यादातर सरकारी दफ्तरों में पानी भर गया। सदर विकास खंड, मंझनपुर कोतवाली, डायट मैदान पानी से लबालब हो गए।
सदर विकास खंड़ में तो घुटनों तक पानी भर गया था। सबसे ज्यादा फजीहत सरकारी आवास में रहने वाले लोगों की हुई। आवास में पानी जाने के कारण घरों में रखा सामान खराब हो गया। कालोनी में रहने वाले दीपक सिंह के अनुसार कई बार नगर पालिका प्रशासन को कई बार शिकायत की जा चुकी है।
इसके बाद भी जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की जा सकी। यही हाल स्वास्थ्य विभाग की कालोनी में रहने वाले सिकंदर का है। उनका कहना है कि बरसात के कारण घर के अंदर पानी भर गया था। लोग पानी में घुसकर बाहर निकलने को मजबूर हुए।
सरकारी भवनों जलनिकासी की व्यवस्था नहीं
जिला अस्पताल, विकास भवन, डायट, सदर कोतवाली, मंझनपुर विकास खंड में कहीं बाउंड्रीवाल तो कहीं नए भवन बनाए गए हैं। इसके बाद भी किसी स्थान पर जल निकासी की व्यवस्था नहीं कराई। बरसात के दिनों में यह समस्या अक्सर होती है। इसके बाद भी विभागों की तरफ से जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं कराई जा सकी है।
नाले में है गड़बड़ी
कस्बे के चकनगर और कटरा नगर में नाला बनाया गया है। इस नाले को कादीपुर के पास ससुर खदेरी नदी में मिलाया जाना था। यह प्रस्ताव पूर्व जिलाधिकारी एम लोकेश के समय में पास हुआ था। डीएम के तबादले के बाद किसी ने नाले को नदी में मिलाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। नतीजतन जिलाधिकारी आवास के आगे नाले का पानी नहीं जा पा रहा है। इसकी वजह से जोरदार बरसात होने में हर साल मुख्यालय में जल भराव की समस्या रहती रहती है।
12 घंटे गुल रही मुख्यालय बिजली
बारिश के कारण मुख्यालय मंझनपुर समेत जिले भर की विद्युत व्यवस्था धड़ाम हो गई। जगह-जगह तार और खंभे टूटने के कारण मंगलवार की रात आठ बजे से ही आपूर्ति बाधित हो गई थी। रात में उपभोक्ता फोन करते रहे, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने कोई काल अटेंड नहीं की। इस कारण पूरी रात जिला मुख्यालय की बत्ती गुल रही। सुबह आठ बजे के बाद सप्लाई बहाल हुई तो लोगों ने राहत महसूस की। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी थी।