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कौशाम्बी : मैने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा... अब चाहे कोई भले ही मुझे मार दे, हम घर छोड़कर नहीं जाएंगे

Sat, 16 Sep 2023 06:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी

सार

जयकरन ने बताया यह जमीन (बंजर) के रूप में दर्ज है। 52 बीघे के रकबे वाली इस आराजी में यादव, चौहान, पाल व निर्मल बिरादरी के लोगों को पट्टा मिला है। इसके बाद लोगों ने यहां घर बनाकर आवासित होना शुरू कर दिया।
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मोहिउद्दीनपुर गौस गांव में खाना बनाती रेनू देवी व उसका पति जय करन यादव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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साहब, इकलौता बेटा राजकुमार परदेश में रहता है। गांव में मैं अपनी पत्नी रेनू देवी के साथ अकेला रहता हूं। मैने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा... अब चाहे कोई भले ही मुझे मार दे, हम घर छोड़कर नहीं जाएंगे। यह कहना है मृतक शिवसरन की झोपड़ी के समीप रहने वाले जयकरन यादव का। 50 घरों की बस्ती में सिर्फ जयकरन के यहां ही उनकी पत्नी खाना बनाते मिली। बाकी के 49 घरों में ताला लटक रहा है।

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जयकरन ने बताया यह जमीन (बंजर) के रूप में दर्ज है। 52 बीघे के रकबे वाली इस आराजी में यादव, चौहान, पाल व निर्मल बिरादरी के लोगों को पट्टा मिला है। इसके बाद लोगों ने यहां घर बनाकर आवासित होना शुरू कर दिया। कुछ दबंग निर्मल को यहांं बसने नहीं दे रहे थे। इस वजह से निर्मल बिरादरी के लोगों ने अपना पट्टा दूसरों को बेच दिया। इसी में एक लालचंद्र निर्मल भी था, जिसकी 10 विस्वा जमीन शिवसरन ने खरीदी थी।

मोहिद्दीनपुर गांव में घरों में लटके ताले। - फोटो : अमर उजाला।

आज तक प्रशासन ने नहीं की पैमाइश

बताया कि यहां पट्टा तो हुआ था, लेकिन किसी कि भूमि कभी नापी नहीं गई। जिसका जहां मन पड़ा, उसने घर बनवा लिया। नौ महीने पहले अमित सिंह से शिवसरन को जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हुआ। पुलिस व प्रशासन के लोग भी आए, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। आजतक किसी भी जमीन को प्रशासन ने नापकर अगल नहीं की। लोग रोड की तरफ ही घर बनवाते चले जा रहे हैं और पीछे खेती करते हैं। फायरिंग व हत्याकांड के बाबत पूछने पर जयकरन ने बताया कि कमरे में कूलर चल रहा था।

वह व उसकी पत्नी अंदर सो रहे थे। सुबह सात बजे मवेशियों को चारा देने के उठे तो हत्या हो जाने की जानकारी मिली। सवाल किया गया कि बस्ती के सारे घरों के लोग भागे हुए हैं आप क्यों नहीं गए तो उनका कहना था कि कहां जाएं, मरने की परवाह नहीं है। 50 घरों की बस्ती में सिर्फ जयकरन के यहां ही उनकी पत्नी खाना बनाते मिली। बाकी जगह या तो ताला बंद था या फिर लोग घर का दरवाजा खोलकर भागे हुए थे। चारों तरफ से सिर्फ पुलिस का पहरा था।

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चोरी छिपे पशुओं को चारा डालती महिला। - फोटो : अमर उजाला।

चोरी से महिलाएं मवेशियों को डाल जातीं है चारा

पंडा चौराहा स्थित बस्ती में अजीब सी खामोशी है। घर के पुरुष, महिला व बच्चों का कोई पता नहींं है। गांव में एएसपी आठ थानों की फोर्स व तीन कंपनी पीएसी के साथ कैंप कर रहें हैं। इसके बाद भी लोग घर नहीं आ रहे हैं। कुछ महिलाएं गांव आकर चोरी से अपने मवेशियों को पहले से तैयार किया हुआ चारा डाल कर चली जाती हैं। शनिवार को एक महिला यादव डेयरी के पास बंधी भैंस को चारा देने पहुंची। उससे परिवार के अन्य लोग व नाम जानने का प्रयास किया गया तो वह बिना कुछ बोले चुपचाप चली गई।

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