मोहिद्दीनपुर गांव में घरों में लटके ताले।
- फोटो : अमर उजाला।
आज तक प्रशासन ने नहीं की पैमाइश
बताया कि यहां पट्टा तो हुआ था, लेकिन किसी कि भूमि कभी नापी नहीं गई। जिसका जहां मन पड़ा, उसने घर बनवा लिया। नौ महीने पहले अमित सिंह से शिवसरन को जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हुआ। पुलिस व प्रशासन के लोग भी आए, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। आजतक किसी भी जमीन को प्रशासन ने नापकर अगल नहीं की। लोग रोड की तरफ ही घर बनवाते चले जा रहे हैं और पीछे खेती करते हैं। फायरिंग व हत्याकांड के बाबत पूछने पर जयकरन ने बताया कि कमरे में कूलर चल रहा था।
वह व उसकी पत्नी अंदर सो रहे थे। सुबह सात बजे मवेशियों को चारा देने के उठे तो हत्या हो जाने की जानकारी मिली। सवाल किया गया कि बस्ती के सारे घरों के लोग भागे हुए हैं आप क्यों नहीं गए तो उनका कहना था कि कहां जाएं, मरने की परवाह नहीं है। 50 घरों की बस्ती में सिर्फ जयकरन के यहां ही उनकी पत्नी खाना बनाते मिली। बाकी जगह या तो ताला बंद था या फिर लोग घर का दरवाजा खोलकर भागे हुए थे। चारों तरफ से सिर्फ पुलिस का पहरा था।
चोरी छिपे पशुओं को चारा डालती महिला।
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चोरी से महिलाएं मवेशियों को डाल जातीं है चारा
पंडा चौराहा स्थित बस्ती में अजीब सी खामोशी है। घर के पुरुष, महिला व बच्चों का कोई पता नहींं है। गांव में एएसपी आठ थानों की फोर्स व तीन कंपनी पीएसी के साथ कैंप कर रहें हैं। इसके बाद भी लोग घर नहीं आ रहे हैं। कुछ महिलाएं गांव आकर चोरी से अपने मवेशियों को पहले से तैयार किया हुआ चारा डाल कर चली जाती हैं। शनिवार को एक महिला यादव डेयरी के पास बंधी भैंस को चारा देने पहुंची। उससे परिवार के अन्य लोग व नाम जानने का प्रयास किया गया तो वह बिना कुछ बोले चुपचाप चली गई।