माफिया अतीक गैंग के फैले साम्राज्य व उससे फंडिंग को लेकर मदद पहुंचाने वालों की कुंडली खंगालने के लिए शुक्रवार रात कौशाम्बी लेकर आ रही पुलिस को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। बीच रास्ते में ही अतीक को दस्त शुरू होने के कारण पुलिस उसे लेकर पूरामुफ्ती कोतवाली पहुंची और वहां टॉयलेट कराने के बाद सीधा इलाज के लिए प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल पहुंची।
माफिया अतीक का जिले में खासकर गद्दी बिरादरी के बीच अच्छा-खासा दखल रहा है। संदीपनघाट कोतवाली के लोहरा, महगांव, सैयदसरावां, पूरामुफ्ती कोतवाली के हटवा, मरियाडीह, सल्लाहपुर, मंदर, बम्हरौली, पिपरी कोतवाली के असरावल कला, गौसपुर कटहुला, सरायअकिल के भखंदा गांव से गहरा नाता है। इसके अलावा वह करारी के एक वरिष्ठ सपा नेता मौला बख्श के यहां भी आता था। पुलिस सूत्रों की मानें तो इन गांवों के लोग जमीनों की खरीद-फरोख्त में अतीक से पैसा लेते थे। जमीन विवादित होने पर उसे तत्काल खरीदा जाता था। इसके बाद माफिया की दखल के बाद जमीन पर कब्जा करके उसे ऊंचे दाम पर बेचा जाता था।
उमेश पाल हत्याकांड से जुड़े कुछ अहम तथ्य
उमेश पाल व उसके दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की हत्या में शूटर साबिर का भी नाम आया है। पांच लाख का इनामियां शूटर फरार है। साबिर की बहन संदीपनघाट कोतवाली के लोहरा गांव में ब्याही है। साबिर की फरारी के बाद उसका भाई जाकिर ने लोहरा में ही आकर पनाह ली। हालांकि बाद में कोखराज कोतवाली के महमदपुर गांव स्थित एक खेत में जाकिर का शव मिला। जाकिर के मोबाइल से कुछ राज मिलने के बाद पुलिस ने सिहोरी व राला गांव के व्यक्ति को उठाया है।
चार मार्च को माफिया के बावर्ची राकेश उर्फ लाला को एसटीएफ ने उसके गांव पश्चिमशरीरा के जाफरपुर महावां गांव से गिरफ्तार किया। बाद में राकेश की निशान देही पर अतीक के चकिया स्थित जमींदोज किए जा चुके कार्यालय से लाखों रुपये कैश व असलहे बरामद किए गए। लाला ने बताया कि माफिया की बीवी शाइस्ता के कहने पर उसने यहां कैश व असलहा छिपाया था। राकेश के ही बयान पर चकिया निवासी अतीक के एक करीबी को जाफरपुर महावां से एटीएफ ने उठाया। वह अपनी बहन के घर पर छिपा था।
कौशांबी के बसेढ़ी से बरामद हुई थी अतीक के बहनोई की कार
उमेश पाल हत्याकांड के बाद 28 फरवरी को संदीपनघाट कोतवाली के बसेढ़ी गांव से लावारिस हालत में एक कार बरामद हुई। पुलिस कार बरामद होने व मालिक का नाम पता ट्रेस होने के बाद भी संजीदा नहीं हुई। छह अप्रैल को कार लावारिस में दाखिल की गई। बाद में पता चला कि गाड़़ी अतीक के मेरठ निवासी बहनोई डॉ. अखलाक की थी। घटना के वक्त उस कार में असद व गुड्डू मुस्लिम भी बैठे थे। कार खराब होने पर वह लोग कार छोड़कर डॉ. अखलाक के यहां पहुंचे। अखलाक की गिरफ्तारी के बाद उसके घर में लगे सीसीटीवी से पता चला कि गु्ड्डू वहां 17 घंटे तक रहा, लेकिन असद पुलिस की भनक लगने पर भाग चुका था।
राजूपाल हत्याकांड के गवाह पर हुआ था हमला
राजूपाल हत्याकांड में सरायअकिल कोतवाली के चकपिन्हा गांव का ओमप्रकाश भी गवाह है। हत्याकांड में भखंदा निवासी माफिया के शूटर अब्दुल कवि का नाम प्रकाश में आया। एक अक्तूबर को कवि ने ओम प्रकाश को गवाही नहीं देने के लिए धमकाया था। विरोध करने पर उसने तमंचे से फायर कर जान लेने का प्रयास किया था। इस घटना का नामजद मुकदमा सरायअकिल कोतवाली में दर्ज है।
शूटर के मददगारों के पास से मिला था असलहों का जखीरा
उमेश पाल हत्याकांड के बाद माफिया अतीक के शूटर अब्दुल कवि को लेकर कौशाम्बी पुलिस संजीदा हुई। पुलिस को शक था कि हत्याकांड के बाद शूटर भखंदा में आकर रुके होंगे। इस पर पुुलिस ने दबिश दी। शूटर तो पकड़े नहीं गए लेकिन उसके घर गिराने के दौरान काफी असलहे व बम बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने कवि के गांव भखंदा, ससुराल कटैया व पुरखास में छापामारी की। इस दौरान 19 लोग गिरफ्तार किए गए। जिनके पास से 44 असलहे बरामद हुए थे। जिसमें से 28 लाइसेंसी शस्त्र भी शामिल हैं। पुलिस रिकार्ड में 21 शस्त्र धारकों का तो पता चल गया लेकिन बाकी के रिकार्ड अभी भी खोजे नहीं मिल रहे हैं।