एआर को-ऑपरेटिव ने कहा आरोप मनगढ़ंत
संवाद न्यूज एजेंसी
भरवारी। नगर स्थित क्रय-विक्रय सहकारी समिति में नियमों को ताक पर रखकर बेटे की नियुक्त करने वाले सचिव ने महकमे के अफसरों पर अवैध वसूली और जांच में तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है। हालांकि, अफसरों ने आरोपों को मनगढ़ंत बताया।
क्रय-विक्रय सहकारी समिति के सचिव उमाशंकर यादव के खिलाफ नियमों के विपरीत अपने बेटे राहुल कुमार की सहायक के रूप में नियुक्ति करने का आरोप लगा था। जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद एआर कोऑपरेटिव आरके द्विवेदी ने उनके खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे। हालांकि, उच्चाधिकारियों की रोक के कारण एफआईआर नहीं हुई।
इसी बीच सचिव ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बेटे की नियुक्त वर्ष 2020 में पूर्व सचिव अशफाक अहमद ने की थी। जब वह सचिव बने तो सिर्फ नवीनीकरण हुआ था। मामले की जांच करने वाले अफसरों ने एडीसीओ, बैंक मैनेजर, तत्कालीन अध्यक्ष का बयान भी नहीं लिया। तत्कालीन एआर द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र का जांच में कोई उल्लेख नहीं है।
उनका आरोप है कि महकमे के एक एडीओ ने उच्चाधिकारियों के नाम पर एक लाख रुपये मांगे थे। रुपये न देने पर जेल भेजने की धमकी दी। किसी तरह 50 हजार रुपये दे दिए। शेष रकम न देने के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है।
इनसेट
अनुमोदन के बिना कराई नियुक्ति, निकाल लिया वेतन
सहायक आयुक्त एवं प्रबंधक साधन सहकारी समितियां आरके द्विवेदी का कहना है कि राहुल कुमार की सहायक के रूप में नियुक्ति के लिए दो बार प्रस्ताव कराए गए। एक प्रस्ताव जून 2020 में सचिव अशफाक अहमद ने तो दूसरा सचिव उमेश कुमार ने सितंबर 2022 में कराया, लेकिन उच्चाधिकारियों से अनुमोदन एक भी बार नहीं लिया। बिना अनुमोदन के नियुक्त अवैध है। सचिव ने वर्ष 2020 के प्रस्ताव के आधार पर हुई नियुक्ति की तिथि से वेतन के करीब 1.70 लाख रुपये निकाल लिए गए। रुपये मांगने का आरोप पूरी तरह गलत है।