मंदिर में रत्नावली और उनके माता-पिता की मूर्ति।
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रत्नावली के घर की जगह बना है रत्नावली जन्म कुटीर मंदिर
महेवाघाट में रत्नावली जन्म कुटीर मंदिर है। इसके पुजारी प्रहलाद पाठक बताते हैं कि मंदिर जिस भूमि पर है वहीं रत्नावली का घर था। खोदाई के दौरान यहां से गणेश जी को गोद में लिए हुए देवी पार्वती के साथ चार अन्य देवियों की खंडित प्रतिमाएं मिली थीं। पार्वती जी की प्रतिमा यहीं चबूतरे पर रखी हुई थी। करीब पांच दशक पहले वृंदावन के महंत रामदास ने यहां मंदिर बनवा दिया। इस मंदिर में श्रीराम दरबार, भगवान शंकर, गणेश जी, गांव की कुल देवी के साथ रत्नावली, उनके पिता दीनबंधु पाठक और मां पार्वती देवी की प्रतिमा भी स्थापित है।
लंबे इंतजार के बाद मेरे प्रभु तंबू से निकल कर महल में जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक दिन पर रत्नावली जन्म कुटीर में 21 जनवरी को रामायण का पाठ शुरू होगा। 22 जनवरी को इसके समापन के बाद दीपोत्सव मनाया जाएगा। - प्रहलाद पाठक, पुजारी, रत्नावली जन्म कुटीर