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राम मंदिर : रामलला को घर मिलने पर तुलसीदास की ससुराल में खुशी, रत्नावली जन्म कुटीर समेत घर-घर जलेंगे दीप

Fri, 12 Jan 2024 01:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

श्रीरामचरित मानस की रचना कर प्रभु श्रीराम की ख्याति देश से लेकर विदेश तक पहुंचाने वाले तुलसीदास जी का पड़ोसी जनपद चित्रकूट के राजापुर में हुआ था, जबकि उनकी पत्नी रत्नावली कौशाम्बी के महेवाघाट की रहने वाली थीं।
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महेवाघाट स्थित रत्नावली मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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चित्रकूट की सीमा पर यमुना के किनारे स्थित महेवाघाट गांव आज खुशी से फूला नहीं समा रहा है। यह वही गांव है, जहां रामचरित मानस के रचयिता तुलसीदास जी की ससुराल थी। अयोध्या में जब रामलला अपने दिव्य व भव्य घर में विराजेंगे तो इसका खास जश्न इस गांव में मनेगा। मंदिर-मंदिर और घर-घर दीप जलेंगे तो कीर्तन व भजन गूंजते रहेंगे।

श्रीरामचरित मानस की रचना कर प्रभु श्रीराम की ख्याति देश से लेकर विदेश तक पहुंचाने वाले तुलसीदास जी का पड़ोसी जनपद चित्रकूट के राजापुर में हुआ था, जबकि उनकी पत्नी रत्नावली कौशाम्बी के महेवाघाट की रहने वाली थीं। हालांकि, रत्नावली के घर और उनके वंश का भले ही नामोनिशां मिट गया हो लेकिन इस गांव के लोगों के मन और मस्तिष्क में उनके प्रति श्रद्धा भाव अब भी बरकरार है।

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इसी गांव में पत्नी के कटुवचन कहने के बाद तुलसीदास जी श्रीराम की भक्ति में डूब गए थे। बाद में उन्होंने श्रीरामचरित मानस की रचना की। इसके चलते भगवान श्रीराम और उनके जीवन से महेवाघाट का नाता जुड़ गया। अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण का इंतजार इस गांव को भी बड़ी बेसब्री से था। अब जब यह ऐतिहासिक दिन आ गया है तो इसकी खुशियां मनाने में महेवाघाट भी पीछे नहीं रहना चाहता है। गांव में कोई सुंदरकांड तो कोई रामचरित मानस का पाठ कराने की तैयारी में है। कोई मंदिर-मंदिर और घर-घर दीपोत्सव मनाने की बात कह रहा है।

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मंदिर में रत्नावली और उनके माता-पिता की मूर्ति। - फोटो : अमर उजाला।

रत्नावली के घर की जगह बना है रत्नावली जन्म कुटीर मंदिर

महेवाघाट में रत्नावली जन्म कुटीर मंदिर है। इसके पुजारी प्रहलाद पाठक बताते हैं कि मंदिर जिस भूमि पर है वहीं रत्नावली का घर था। खोदाई के दौरान यहां से गणेश जी को गोद में लिए हुए देवी पार्वती के साथ चार अन्य देवियों की खंडित प्रतिमाएं मिली थीं। पार्वती जी की प्रतिमा यहीं चबूतरे पर रखी हुई थी। करीब पांच दशक पहले वृंदावन के महंत रामदास ने यहां मंदिर बनवा दिया। इस मंदिर में श्रीराम दरबार, भगवान शंकर, गणेश जी, गांव की कुल देवी के साथ रत्नावली, उनके पिता दीनबंधु पाठक और मां पार्वती देवी की प्रतिमा भी स्थापित है।

 

लंबे इंतजार के बाद मेरे प्रभु तंबू से निकल कर महल में जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक दिन पर रत्नावली जन्म कुटीर में 21 जनवरी को रामायण का पाठ शुरू होगा। 22 जनवरी को इसके समापन के बाद दीपोत्सव मनाया जाएगा। - प्रहलाद पाठक, पुजारी, रत्नावली जन्म कुटीर

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