सरसंवा ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत पचामा गांव में शुक्रवार को विनोद सिंह ने अपनी माता की मृत्यु के बाद नेत्रदान किया। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय जानकीकुंड चित्रकूट से आए हुए नेत्र सर्जन डॉ संदीप ने अपनी टीम के साथ पचामा गांव पहुंच कर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कर आंखें सुरक्षित किया।
सरसंवा ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत पचामा गांव में शुक्रवार को विनोद सिंह ने अपनी माता की मृत्यु के बाद नेत्रदान किया। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय जानकीकुंड चित्रकूट से आए हुए नेत्र सर्जन डॉ संदीप ने अपनी टीम के साथ पचामा गांव पहुंच कर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कर आंखें सुरक्षित किया। कौशाम्बी बुद्धिस्ट मानेस्टरी के ट्रस्टी विनोद सिंह की माता और डाक्टर अभिषेक सिंह की दादी राजकुमारी ने नेत्रदान का संकल्प लिया था। शुक्रवार को उनका निधन हो गया। इसकी सूचना आई बैंक को दी गई।
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सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के सर्जन डॉ संदीप ने आई बैंक टेक्नीशियन विशाल रजक और कार्तिकेय सिंह के साथ गांव पहुंच कर सुरक्षित समय के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया। डाक्टर संदीप ने परिजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेत्रदान का पुण्य कार्य करके सामाजिक योगदान किया है। कहा कि नेत्रदान को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं होने के कारण अंधेपन की बहुत बड़ी समस्या से लाखों लोगों को जूझना पड़ रहा है। मौजूदा समय में देश में 50-60 लाख लोगों को कॉर्निया की जरूरत है लेकिन नेतदान के लिए एक लाख से भी कम लोग मौजूद हैं।
इसके साथ ही 10 से 20 साल आयु वर्ग में क्रैटोकोनस और बड़ों में इनफेक्शियस कैरेटाइटिस, माड़ा सफेदी, फ्युकस एंडोथेलियल डिस्ट्रॉफी आदि आंखों की बीमारियों के इलाज के लिए नेत्रदान में मिलने वाली आंखों की जरूरत होती है। नेत्र सर्जन डाक्टर संदीप ने कहा कि, आज हुए नेत्रदान से कम से कम चार लोगों के जीवन का अंधेरा दूर होगा। लोगों को नेतदान की पुण्य कार्य में आगे आना चाहिए। इस अवसर पर राकेश सिंह,कुबेर सिंह,भरत, इन्द्रजीत,राजू आदि सैंकड़ों ग्रामीणों के साथ गायत्री नेत्र चिकित्सालय के डाक्टर बृजेश सिंह नेत्र सहायक मौजूद रहे।