यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बोर्ड ने शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। सब कुछ सही रहा तो इस साल की परीक्षा में इंटरमीडिएट में हाईस्कूल की तरह आंतरिक मूल्यांकन व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी।
बोर्ड की परीक्षा में छात्रों को लिखित के साथ ही आंतरिक मूल्यांकन के अंंक मिलते हैं। यह अंक विद्यालय की ओर से दिए जाते हैं। इन अंकों का छात्रों के परिणाम पर विशेष प्रभाव पड़ता है। छात्र को 70 नंबर के सवालों का ही जवाब देना होता है। अन्य 30 अंक उसे बिना लिखे और अपनी बेहतर कार्यशैली व शिक्षण कार्य के दम पर मिल जाते हैं। 30 अंक विद्यालय को देने होते हैं।
ऐसे में बेहतर परिणाम बनाने में यह अंक महत्वपूर्ण होते हैं। छात्र स्कूलों में अच्छा व्यवहार भी करते हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक नीरज केसरी ने बताया कि इस प्रकार की व्यवस्था नीतिगत होती है। इसकी जिला स्तर पर चर्चा नहीं होती। लेकिन यह तय है कि नई शिक्षा नीति के अनुसार व्यवस्था जरूर होनी है। कई बार बैठकों में इस पर चर्चा हुई है।
शिक्षक और छात्रों की राय
आंतरिक मूल्यांकन के कई फायदे होते हैं। इससे छात्रों की क्रेडिट बढ़ती है। उनको अच्छे नंबर मिलते हैं। अंक प्रतिशत बढ़ाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। पर जरूरी है कि विद्यालय में अच्छा माहौल बना रहे।
- राकेश सिंह, प्रवक्ता भौतिक विज्ञान
हाई स्कूल की तर्ज पर इंटर की परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन से हर छात्र के बारे में शिक्षकों को जानकारी होगी। उनकी हर गतिविधि पर नजर रहेगी। इससे स्कूल का अनुशासन भी बेहतर होगा।
- राजू यादव, प्रधानाचार्य जीआईसी देवखरपुर।
गैर प्रयोगात्मक विषय में भी आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर यदि नंबर मिलते हैं, तो यह बेहतर है। कम लिखना होगा और अंक बेहतर मिलेंगे।
- रितेश कुमार, छात्र
इस व्यवस्था से उन छात्रों का नुकसान होगा, जो पढ़ने में बेहतर है। जबकि जो छात्र शिक्षकों के ज्यादा करीब रहेंगे। उनको बेहतर नंबर मिलेगा।
- कविश केसरवानी, छात्र
राजू यादव, प्रधानाचार्य जीआईसी देवखरपुर
राजू यादव, प्रधानाचार्य जीआईसी देवखरपुर
राजू यादव, प्रधानाचार्य जीआईसी देवखरपुर