देश में उपजे कोयला संकट के कारण जिले में विद्युत आपूर्ति लड़खड़ा गई है। हफ्ते भर से इमरजेंसी रोस्टिंग के नाम पर नगरीय इलाकों में तीन व ग्रामीण क्षेत्रों में छह घंटे तक की कटौती की जा रही है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। विद्युत निगम के अधिकारी कारपोरेशन से उपकेंद्रों को ही बिजली नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। ये समस्या कब तक रहेगी इस बारे में भी अधिकारी कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
जिले में 35 विद्युत उपकेंद्रों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जाती है। जिला मुख्यालय को कटौती मुक्त रखते हुए तहसील मुख्यालयों को 22 घंटे, नगरीय निकायों को 20 व ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे विद्युत आपूर्ति कराने की व्यवस्था की गई थी।
ग्रामीण क्षेत्रों में दिन में छह घंटे व रात में शाम छह से सुबह छह बजे तक 12 घंटे आपूर्ति होती थी। लेकिन एक हफ्ते से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली की इमरजेंसी रोस्टिंग ने मुसीबत बढ़ा दी है। हाल यह है कि नगरीय क्षेत्र में जहां आपूर्ति तीन घंटे तक कम हो गई है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छह घंटे तक बिजली कटौती हो रही है।
बिजली कटौती लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन रही है। रात में होने वाली कटौती लोगों की नींद में खलल डाल रही है। वहीं विद्युत निगम के अफसर ऊपर से ही उपकेंद्रों को बिजली आपूर्ति नहीं होने की बात कह रहे हैं। निगम के अधिकारियों का कहना है कि विद्युत उत्पादन केंद्रों पर कोयले की कमी की वजह से बिजली का उत्पादन कम हो रहा है।
ऐसे में आपूर्ति भी कम मिल रही है। इस वजह से पहले उन उपकेंद्रों की बिजली काटी जा रही है, जहां बकाया अधिक है। इसके बाद भी कमी होने पर अन्य उपकेंद्रों पर भी कटौती की जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागकर बीत रही रात
सबसे अधिक कटौती का दंश ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग झेल रहे हैं। रात में एकमुश्त चार घंटे की इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। जबकि दिन और रात को मिलाकर दो घंटे तक ट्रिपिंग के कारण आपूर्ति बाधित रहती है। इस वजह से रात में ग्रामीण बिजली के लिए परेशान होते हैं। विद्युत निगम के अधिकारी भी ग्रामीणों की शिकायतों का जवाब नहीं देते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उपकेंद्र के जिम्मेदार सीयूजी नंबर बंद रखते हैं। यदि फोन चालू भी मिला तो घंटी बजती रहती है, पर फोन रिसीव नहीं होता है।
वर्तमान में बिजली की समस्या चल रही है। बिजली की उपलब्धता के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। कुछ उपकेंद्रों पर तीन घंटे तो कुछ पर अधिक समय की इमरजेंसी रोस्टिंग की जा रही है। एक सप्ताह में हालात सामान्य होने की उम्मीद है।
सुशील श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता
अघोषित विद्युत कटौती : रामलीला व पूजा पंडालों में की रौनक फीकी
विद्युत उपकेंद्र में एक सप्ताह से अघोषित बिजली कटौती के कारण रामलीला व दुर्गापूजा कमेटियों के लोग परेशान हैं। आयोजकों के मुताबिक 24 घंटे में बमुश्किल 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। शाम छह बजे गुल हुई बिजली रात को वापस दस बजे आती है। रात के अंधेरे में लोग असुरक्षित महसूस करते हुए घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं।
इसका असर रामलीला व दुर्गापूजा पंडालों पर पड़ रहा है। पूजा पंडालों व रामलीला में सन्नाटा रहने से आयोजक भी परेशान हैं।
सरायअकिल उपकेंद्र से जुड़े कस्बा सरायअकिल, नेवादा, जलनिगम, पुरखास, मंझनपुर व कृषि फीडर हैं। इन फीडरों के जरिए कस्बा सरायअकिल, खोंपा, घोसिया, किशुनपुर अंबारी, बरई, इछना, भगवानपुर, बहुंगरा, फजुल्लापुर, अतरसुइया समेत 50 गांवों को बिजली आपूर्ति की जाती है। ग्रामीणों की अनुसार तो पिछले एक सप्ताह से बिजली की अघोषित कटौती चल रही है।
निर्धारित रोस्टर के मुताबिक बिजली सप्लाई नहीं की जा रही है। 24 घंटे में बमुश्किल 10 से 12 घंटे ही उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई मिल पा रही है। सबसे ज्यादा कटौती तो शाम को रही है। शाम छह बजते ही आपूर्ति बाधित कर दी जाती है। फिर रात 10 बजे या उसके बाद ही आपूर्ति बहाल की जाती है। इन दिनों कस्बा समेत ग्रामीण इलाकों में दुर्गा पूजा पंडाल सजाए गए हैं। रामलीला का मंचन भी हो रहा है। ऐसी स्थिति में अंधेरा होने के कारण दुर्गापूजा एवं रामलीला के दर्शक बाहर कम ही निकलते हैं।